रजिस्ट्रार का स्टेनो रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

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पटवध आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। मान्यता के नाम पर रिश्वत लेने की शिकायत एक प्रबंधक द्वारा बिजलेंस टीम से की गयी थी। शिकायत के आधार पर विजलेंस टीम ने महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के स्टेनो को 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में गोरखपुर से आई विजिलेंस की टीम ने छापेमारी करते हुए रजिस्ट्रार डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा के स्टेनो संजय यादव को 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही विजिलेंस की टीम ने जब स्टेनो के ऑफिस की आलमारी की तलाशी ली तो आलमारी में रखे एक लाख 80 हजार रुपए नगद भी बरामद हुए। इस मामले में पीड़ित सुजीत सिंह ने विजिलेंस टीम से शिकायत की थी। रजिस्ट्रार के स्टेनो संजय यादव डिग्री कॉलेज की मान्यता दिलाने के नाम पर तीन लाख रुपये की डिमांड किए थे जिसमें 50000 दिए गए थे इसी दौरान टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
इस संबंध में रामबचन महिला महाविद्यालय के प्रबंधक सुजीत सिंह ने महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ.अंजनी कुमार मिश्रा से मिलकर मान्यता दिलाने को लेकर चर्चा की थी। सुजीत सिंह का आरोप है कि रजिस्ट्रार ने मान्यता दिलाने को लेकर अपने क्लर्क संजय यादव को तीन लाख रुपये देने का निर्देश दिया था। पहले 50 हजार लिए गए जबकि ढाई लाख रुपए काम होने के बाद लेना था। पीड़ित सुजीत सिंह का कहना है कि जिस तरह से डिग्री कॉलेज की मान्यता दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही थी। ऐसे में इस मामले की शिकायत विजिलेंस टीम से करना बेहतर समझा और मामले की सूचना गोरखपुर की विजिलेंस टीम को दी गई। पहले से ही तैयार विजिलेंस टीम ने जैसे ही पीड़ित सुजीत सिंह ने पैसे दिए तुरंत आरोपी को हिरासत में ले लिया। सुजीत सिंह का कहना है कि जिस तरह से रिश्वतखोरी मान्यता को लेकर चल रही है। निश्चित रूप से दुखद है। वहीं विजिलेंस टीम आरोपी को लेकर गोरखपुर चली गई।
सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि ऐसा ही एक मामला शहर स्थित एक प्रतिष्ठित महाविद्यालय का भी है जहां प्रबंध समिति के विवाद के बावजूद भी बार-बार शिकायत करने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रशासक नहीं नियुक्त किया जा रहा है। मान्यता देने के नाम पर पैसों की डिमांड की जा रही है।
नाम न छापने की शर्त पर कुछ महाविद्यालयों के प्रबंधकों ने बताया कि विश्वविद्यालय में इस तरह का खेल विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से ही चल रहा है। कोई भी कार्य बिना रिश्वत दिये नहीं होता। रिश्वत के अभाव में फाइलें एक टेबल से दूसरे टेबल तक नहीं पहुंचती हैं।
रिपोर्ट-बबलू राय

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