आज़मगढ़ (सृष्टिमीडिया)। विश्व बौद्ध महासंघ की मंडल इकाई, आज़मगढ़ के तत्वावधान में त्रिशरण बुद्ध विहार, हरबंशपुर में एक दिवसीय पालि भाषा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में धम्म उपासकों, उपासिकाओं, विद्यार्थियों तथा बौद्ध साहित्य के अध्येताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य प्रशिक्षक डॉ॰ प्रफुल्ल गड़पाल, एसोसिएट प्रोफेसर, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर, ने पालि भाषा के ऐतिहासिक, भाषिक एवं व्याकरणिक स्वरूप पर अत्यंत प्रभावशाली प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने बताया कि पालि भाषा केवल बौद्ध धर्मग्रंथों की भाषा ही नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परम्परा की एक महत्त्वपूर्ण धरोहर है। उन्होंने प्रतिभागियों को पालि वर्णमाला, उच्चारण, शब्द-रचना, संधि, समास तथा प्रारम्भिक व्याकरण के सिद्धान्तों का सरल, व्यावहारिक एवं उदाहरण-आधारित प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अनेक पालि सूत्रों एवं वाक्यों का विश्लेषण कर यह समझाया कि व्यवस्थित व्याकरण के माध्यम से पालि भाषा का अध्ययन अत्यंत सहज और रोचक बनाया जा सकता है। प्रतिभागियों ने प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय भाग लेकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
डॉ॰ गड़पाल ने अपने संबोधन में कहा कि यदि भगवान बुद्ध के मूल उपदेशों को उनके वास्तविक स्वरूप में समझना है, तो पालि भाषा का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से पालि भाषा सीखने, बौद्ध साहित्य का अध्ययन करने तथा धम्म के मूल स्रोतों से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में चंद्रशेखर आज़ाद, रवि कुमार, अजित चंद्र बौद्ध, देवेंद्र प्रसाद तथा हीरा लाल गौतम सहित विश्व बौद्ध महासंघ के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/ज्ञानेन्द्र कुमार