आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। जुलूसे चेहल्लुम रविवार को नगर में परंपरागत तरीके से निकाला गया। इसमें काफी संख्या में महिला, पुरुष व बच्चों ने भाग लिया। जुलूस मीरबाग पेटू से निकलकर पुरानी कोतवाली, चौक, सब्जीमंडी, कटरा होते हुए कर्बला के मैदान पहुंचा जहां पर पूरा माहौल शोकाकुल रहा।
चेहल्लुम में लोग सीनाजनी कर कर्बला में नवास-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन व उनके 71 साथियों की दर्दनाक शहादत सुनकर रो रहे थे। अपनी संवेदना नम आंखों से जाहिर कर रहे थे। कहा गया कि कर्बला में जैसी बर्बरता दरिंदगी और हैवानियत का रूप देखने को मिला, इंसानी तारीख में ऐसी मिसाल और कहीं नहीं मिलती। हिंसा बनाम अहिंसा की जंग के बारे में अगर किसी को जानना है तो उसे कर्बला के वाकयात को जरूर समझना चाहिए, जहां सिर्फ घर के बूढ़े और बच्चों को शहीद ही नहीं किया गया, बल्कि घर जलाकर हजरत इमामे हुसैन के घर की औरतों, बच्चों को कष्ट पहुंचाया गया। कर्बला में जनाबे मुस्लिम और उनके दोनों बेटों के ताबूत, अंगारे का मातम देख लोगों ने खिराजे अकीदत पेश की। कर्बला के मैदान में लगाया गया अलम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान पुरानी सब्जी मंडी इमामबाड़े पर सैय्यद इजाज हुसैन अली इमाम के नेतृत्व में चेहल्लुम के जुलूस का इस्तेकबाल किया। इमामबाड़े पर जनाब मौलाना इकरार साहब ने तकरीर पढ़ी। अंजुमन गुलशने इस्लाम भौवरा, अंबेडकरनगर ने नौहाख्वानी व सीनाजानी किया। शिया कमेटी चेयरमैन सैय्यद अजाददार हुसैन, जीशान अली आजमी के जानिब से तमाम लोगों की जानिब से जुलूसे चेहल्लुम सम्पन्न हुआ।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/ज्ञानेन्द्र कुमार