आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर पहचान संचार माध्यमों के जरिये मिला है। आज देश ही नही समूचे विश्व मे हिंदी भाषा को पहचान मिली उसमें सोशल मीडिया की अहम भूमिका है। उक्त बातें सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार शर्मा ने कही।
कुलपति ने कहा कि आज हम सभी के लिए सोशल मीडिया संकट का काम कर रहा है। लेखनी का जो विचारों के साथ सामंजस्य था उससे नई पीढ़ी दूर हो रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिल को स्पर्श करने वाली भाषा है। इसकीं व्यापकता को सुरक्षित करने की जरूरत है। भाषा से हमारी संस्कृति की रक्षा कर सकती है। इसलिए भाषा का सम्मान जरूरी है।
मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ अनिल राय ने हिंदी भाषा और साहित्य पर संचार माध्यमों का प्रभाव विषय पर बोलते हुए कहा कि हिंदी को आज विश्व स्तर पर पहचान मिली है। हिंदी पर अंग्रेजी की काली छाया को हावी करने की कोशिश की जा रही है। इससे बचने की जरूरत है। कार्यक्रम को डॉ. इशरत जहां, डायट प्राचार्य अमरनाथ राय, पंकज वात्स्यायन, डॉ.मनीषा मिश्रा ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता संस्था की संरक्षक डॉ.मालती मिश्रा तथा संचालन देवेंद्र तिवारी ने किया। इस अवसर पर डॉ आनंद मिश्र, विजयेंद्र श्रीवास्तव रविन्द्र अस्थाना प्रतिभा पाठक अजय पांडेय द्विजराम यादव पत्रकार मधुकर तिवारी भालचंद्र त्रिपाठी जगदम्बा दुबे ईश्वर चन्द्र त्रिपाठी राजाराम सिंह हरिहर पाठक आशा सिंह रुद्रनाथ चौबे आदि लोग मौजूद थे।
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काव्य संग्रह का हुआ विमोचन
आजमगढ़। साहित्यानुरागी संस्था द्वारा प्रकाशित काव्य संग्रह ‘छोटे शहर की बड़ी काव्य सम्भावनाये’ का विमोचन हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में किया गया। विमोचन आजमगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रदीप शर्मा ने किया। इस काव्य संग्रह में आजमगढ़ जनपद की चुनिंदा 25 प्रतिष्ठित और नवोदित हिंदी की रचनाकारों की कविताओं का प्रकाशन किया गया है। मुख्य अतिथि ने इस काव्य संग्रह के सभी रचनाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।
रिपोर्ट-प्रमोद कुमार यादव