आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। हिन्दुस्तानी एकेडमी उत्तर प्रदेश प्रयागराज एवं हिन्दी विभाग डीएवी पीजी कालेज आजमगढ़ के संयुक्त तत्वाधाान में शनिवार को महाविद्यालय के सेमिनार हाल में प्रख्यात साहित्यकार स्व.डॉ.कन्हैया सिंह की जन्म जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ‘हिन्दी सूफी काव्य में हिन्दू संस्कृति’ रहा। अध्यक्षता महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.संजीव कुमार ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष प्रो.सदानन्द प्रसाद गुप्त को अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति, व आस्ट्रेलिया के मेलवर्न में भारतीय गौरव सम्मान से सम्मानित डॉ. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि मेरा कार्य क्षेत्र दक्षिणी भारत मद्रास रहा। बाद में मैं पूर्वांचल आयी और 2020 से 2023 तक कार्य कारने का मौका मिला। हिन्दी सूफी काव्य परम्परा में हिन्दू संस्कृति विषय पर बोलते हुए उन्होने कहा कि डॉ. कन्हैया सिंह की शैली एक दम अलग थी। भारत विविधताओं का देश है उन्होने कहा कि जब सूफी यहां आये तो वह भारतीय जनमानस में बसने के लिए आये। सूफी साहित्य में दोनो संस्कृतियों के मिलन का प्रसंग है। सूफी में कहा गया है कि मैं ही सत्य हूॅ। सूफी साहित्य में भारत की मिट्टी भारत की हवा ये सभी मिल जाती है। उन्होने कहा कि मलिक मुहम्मद जायसी का 12 मासा वियोग खण्ड है जिसमें प्रकृति का सौदर्न्य है। प्रकृति हर क्षण अपना रुप बदलती है जिसका वर्णन किया गया है। डा. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि जितने भी रचनाकार हैं सभी ने बसुधैव कुटुम्बकम का परिचय दिया। सूफी सहित्य अच्छी धारा है। उन्होने कहा कि भक्ति काल में सूफी साहित्य भी लिया गया और रामचरित मानस भी लिखा गया। उन्होने कहा कि जो शोधार्थी जगत है वह सूफी साहित्य, भारतीय संस्कृति अलग-अलग विषयों को लेकर शोध करें। यदि आप शोध करते हैं तो हिन्दी साहित्य के लिए बहुत ही सुन्दर होगा।
इस अवसर पर जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति प्रो.एनके शुक्ला, मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर के कुलपति रविशंकर, जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो.योगेंद्र प्रताप सिंह, डॉ.गीता सिंह, डॉ.कन्हैया सिंह के भतीजे डॉ.पंकज सिंह, असि.प्रो.अवनीश राय, विनम्रसेन सिंह, डॉ.निरंजन, डॉ.सुजीत कुमार सिंह, प्रो.रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव, प्रो.अखिलेश चंद्र, प्रो.हसीन खान, प्रो.सुजीत कुमार श्रीवास्तव, डॉ.निधि सिंह, निष्ठा सिंह, अभिषेक पांडेय, विनीत सिंह, चित्रसेन सिंह, डॉ.प्रवेश सिंह आदि उपस्थित रहे।