एक सत्संग जैसी होती हैं पुस्तकें

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आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। पांचजन्य वार्षिक सदस्यता अभियान एक से 15 सितंबर के कार्यक्रम की बैठक एक होटल के हाल में प्रांत प्रचारक सुभाष चंद के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
प्रांत प्रचारक सुभाष चंद ने कहा कि पुस्तके सत्संग जैसी होती हैं पुस्तके एक विचार होती हैं। लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का पुस्तक एक सजग माध्यम है। आपस में सांस्कृतिक और परिवारिक सामाजिक एक आत्म मानव भाव, लोक कल्याण, भारत की संस्कृतियों को अग्रसारित करने का एक सशक्त माध्यम पांचजन्य पत्रिका जिसका प्रथम संपादन 1948 में शुरू किया गया। इसके प्रथम सम्पादक पंडित अटल बिहारी बाजपेई बनाए गए। प्रत्येक भारतवासियों के घर में यह पत्रिका अवश्य रखनी चाहिए। जिससे उनको देश दुनिया की जानकारी होने के साथ ही अपनी संस्कृतियों और अपने संस्कारों के माध्यम को जानने का भी शुभ अवसर प्राप्त होता है। यह एक अच्छी पत्रिका है। यह एक मित्र के समान होती हैं। जिससे सत्संग का तादात्म स्थापित होता है। पढ़ने की आदत और संवाद से समाधान होता है। इस अवसर पर विभाग प्रचारक सत्येंद्र, कामेश्वर, पंकज, ध्रुव सिंह आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट-ज्ञानेन्द्र कुमार

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