लालगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थानीय तहसील के बसही इकबालपुर गांव में स्थित मदरसा सफीना-ए-हक की तरक्की और शैक्षिक स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बुधवार को एक बैठक की गई। ग्रामीणों ने मदरसे की बेहतरी के लिए विभिन्न प्रकार के सुझाव दिए।
मौलाना खालिद आज़मी ने कहा कि मदरसे प्राथमिक शिक्षा की रीढ़ होते हैं, इसलिए इनकी मजबूती आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गांव के मदरसों में छोटे बच्चों को उस उम्र में शिक्षा दी जाती है, जब वे दूर-दराज के स्कूलों तक नहीं पहुंच पाते।
उन्होंने कहा कि यदि मदरसे कमजोर होंगे तो समाज शैक्षिक और नैतिक रूप से पिछड़ जाएगा। इसलिए गांव के लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर मदरसे की उन्नति के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी इमारत की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है, उसी तरह शिक्षा की मजबूती के लिए मदरसों का सुदृढ़ होना जरूरी है। शिक्षा को विकास की बुनियाद बताते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी समाज शिक्षा के बिना प्रगति नहीं कर सकता। अंत में मदरसे के विकास के लिए सामूहिक प्रयास तेज करने का संकल्प लिया गया।
बैठक में सुफियान अहमद, शकील अहमद, मुजाहिद सिद्दीकी, रफीउद्दीन बब्लू, मोहम्मद ज़ेयाद, आलमगीर, सदरे आलम, शाह आज़म, अब्दुल खालिक, हाफिज ज़रवर, अबुल वैस, सालेहीन प्रधान, नाजिम मंसूर अहमद, अबुल कलाम, मोहम्मद सैफ, इसरार अहमद, मोहम्मद शारिक, परवेज अहमद और अफ़ज़ाल अहमद आद मौजूद रहे।
रिपोर्ट-मकसूद अहमद