निजामाबाद आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थानीय कस्बे में हिन्दी दिवस के अवसर पर साहित्य प्रेमियों ने कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और हिन्दी के विकास में उनके योगदान को याद किया।
भाजपा जिला मंत्री संतोष गोंड ने कहा कि हरिऔध जी ने हिन्दी भाषा के विकास में बहुत काम किया। उनका मानना था कि स्वतंत्रता अपनी भाषा और वाणी के अभाव में पराश्रमित बनी रहेगी। इस सोच का नेतृत्व अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध, आचार्य चंद्रबली पाण्डेय, सेठ गोविंद दास, पुरुषोत्तम दास टंडन आदि और स्वयं महात्मा गांधी कर रहे थे। इसके अलावा हरिऔध जी राजनीतिक आंदोलन से हटकर हिन्दी के अंदर जन ग्राह्यता का वह रूप देना चाहते थे जिससे हिन्दी स्वयं ही सर्वजन, सर्वदेश स्वीकार हो जाय। अमरजीत यादव ने कहा कि भाषा के संवर्धन और शब्द-समृद्ध की दृष्टि से हरिऔध जी कृति रसकलश का महत्व है। भाषा के विकास की दृष्टि से रसकलश अन्यतम ग्रंथ है। उन्होंने ने कहाकि खड़ी बोली में पहला महाकाव्य ‘प्रियप्रवास’ लिखने के अलावा हरिऔध ने प्रिय प्रवास, वैदेही बनवास, चोखे चौपदे, चुभते चौपदे, ठेठ हिन्दी का ठाठ, रस कलश सहित कई ग्रंथ लिखकर हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। आदिल शेख ने कहा कि हरिऔध जी ने कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास, आलोचना सहित सभी विधाओं में अपनी कलम से लोहा मनवाया। निजामाबाद का नाम हरिऔध जी के नाम से जाना पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थल का शीघ्र सुन्दरीकरण कराया जाएगा। कस्बे में जो भी व्यक्ति प्रवेश करे, उसकी नजर प्रतिमा पर पड़े। इस अवसर पर मनोज पांडेय, गगन कश्यप, सचिन गुप्ता, अनिल सोनकर, शहजादे आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट-वीरेन्द्रनाथ मिश्र