पटवध आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। विकास खंड बिलरियागंज अंतर्गत श्रीनगर सियरहां गांव में लगभग 250 वर्ष पहले अपने दादा परदादा की जन्मभूमि की खोज करते हुए अपने पूर्वजों की याद में न्यूयॉर्क अमेरिका से आए हुए डॉ. विष्णु विश्राम ने गौरवान्वित महसूस किया। उनके साथ उनके बहनोई जगजीत विश्राम और बहन चंद्रावती विश्राम भी रहीं।
न्यूयार्क से आये डॉ.विष्णु विश्राम ने बताया कि उनकी परदादी और परदादा को गिरमिटिया मजदूर के रूप में अंग्रेजों द्वारा इनको गुवाना ले जाया गया था। वहां परदादा की तीसरी पीढ़ी में विष्णु विश्राम अपने कई भाई बहनों में सबसे जागरूक हुए और उन्होंने अपने पैतृक पूर्वजों को खोजना शुरू किया। इनकी परदादी और परदादा के बर्थ सर्टिफिकेट से पता चला कि यह लोग इंडिया के उत्तर प्रदेश के कंधरापुर थाना अंतर्गत सियरहां गांव के रहने वाले थे जिसकी जांच पड़ताल में लगभग 25 साल डॉ.विष्णु विश्राम को लगा। उन्हें पवन उपाध्याय नामक एक जर्नलिस्ट का कहीं से नंबर मिला। इसके बाद जर्नलिस्ट पवन उपाध्याय ने डॉ. विष्णु विश्राम के पूर्वजों का पता सियरहां (श्रीनगर) गांव के उमेश चंद्र राय पुत्र स्व.सूर्यभान राय के बारे में जानकारी मिली। यह जानकारी डॉ.विष्णु विश्राम को मिलते ही उनकी खुशी का ठिकाना न रहा और वह अपने बहन बहनोई को लेकर 16 नवंबर 2022 को अपने पूर्वजों की जन्मभूमि पर पहुंचे और खुशी का इजहार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मुझे हिंदुस्तानी होने का बहुत ही गर्व है। आज मैं यहां आकर अपने को बहुत धन्य समझ रहा हूं। कार्यक्रम के अंतर्गत उमेश चंद्र राय के परिवार में उनके बच्चे अमरीश, वंशिका, अंकिता, अनामिका और बहन प्रमिला तथा मीना और छोटे भाई प्रदीप, पत्नी अलका और उनके बच्चे कृतिका, आदित्य, अभिनंदन और भांजे दक्ष से मिलकर दोनों पक्षों ने खुशी की अनुभूति की। हिंदी और अंग्रेजी दोनों पक्ष का ट्रांसलेट करने के लिए मऊ जनपद के रहने वाले डॉ.प्रभाकर मिश्रा उपस्थित रहे।
रिपोर्ट-बबलू राय