आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। श्रीकृष्ण जी पूर्ण ब्रह्म है उनके अनेकों रूप हैं जो जिस रूप में चाहता है वह उसे उसी रूप में प्राप्त होते हैं जो भी उनकी भक्ति में लिप्त हुआ वह उसका दीवाना हो गया। उक्त बातें वृंदावन से पधारे स्वामी चित्य प्रकाशानंद जी महाराज ने नगर पंचायत जहानागंज के तुलसीपुर गांव में स्व.डॉ.मंगला सिंह की स्मृति में आयोजित सात दिवसीय श्री हनुमत महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रवचन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत् सद्गुणों सदविचारों का अथाह सागर है। इस सागर में जो भावविभोर होकर जितनी गहराई में डुबकी लगाता है उसे उतने ही आनंद की प्राप्ति होती है। ईश्वर के सानिध्य में ही जीवन की सार्थकता है। साध्वी अपराजिता ने कहा कि परमात्मा प्रकाश का स्वरूप है। उसके दर्शन के लिए दिव्य ज्ञान और परम ज्योति की आवश्यकता होती है।
जब स्वामी जी महाराज ने श्री कृष्णा और रुक्मणी का विवाह प्रसंग सुनाने के बाद कृष्ण और रुक्मणी के स्वरूप में दो बच्चियों को सजा कर शादी की रश्म कराई और गायक कलाकारों ने दुलहा बने नंदलाल की रुक्मिणी दुलहन बनी गीत सुनाया भाव विभोर होकर श्रद्धालु झूम कर नाचने लगे।
कार्यक्रम के आरंभ में ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, शैलेंद्र यादव, कमलाकर उर्फ शनी सिंह, डॉ.आलोक पांडेय, फत्तेपुर मंडरांव की प्रमुख मीनू सिंह, प्रवीण कुंवर सिंह, दुलारे सिंह, यशवंत सिंह, विजय सिंह उर्फ भक्कू, हवलदार, विजय सिंह, रामरूप सहित करीब 12 सेवानिवृत सैनिकों ने परेड एवं सलामी करते हुए महाराज जी का माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। संचालन शिक्षक कमलेश राय ने किया।
रिपोर्ट-ज्ञानेन्द्र कुमार