फूलपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। उत्तर प्रदेश में मनरेगा के तहत कार्यरत करीब 36 हजार ग्राम रोजगार सेवकों ने अपने नियमितीकरण और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में 10 सूत्रीय मांगों के जरिए वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है।
ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि वे वर्ष 2006 से प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कार्यरत हैं और सरकारी योजनाओं के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें न तो नियमित कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही समुचित वेतन व सुविधाएं। उनका मानदेय भी समय से नहीं मिल पाता, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
कई कर्मियों का 12 से 14 माह का मानदेय बकाया है, जिसके चलते परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और इलाज तक प्रभावित हो रहा है। साथ ही ईपीएफ, बोनस, स्वास्थ्य बीमा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
ग्राम रोजगार सेवकों ने मांग की है कि उन्हें सहायक सचिव/ग्राम विकास सहायक के पद पर समायोजित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इसके अलावा न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक मानदेय, समय पर भुगतान, मानव संसाधन नीति का निर्धारण, कार्यों में पारदर्शिता, आकस्मिक व चिकित्सा अवकाश की व्यवस्था, और कार्यों की बेहतर मॉनिटरिंग के लिए संसाधन उपलब्ध कराया जाय।
कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आगामी 5 मई को बैठक कर विधानसभा का घेराव जैसे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
इस अवसर पर विजय कुमार यादव, ममता यादव, माधुरी यादव, नीलम यादव, राजकुमार, रमाशंकर, धर्मेंद्र, रीता, रवि, रंजीता, मीरा आदि मौजूद रहीं।
रिपोर्ट-पप्पू सिंह/मुन्ना पाण्डेय