जलवायु संकट से निपटने को गांवों में बढ़ेगी जैविक खेती

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अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान द्वारा शुक्रवार को ब्लॉक सभागार में जलवायु संकट, पर्यावरण संरक्षण और रासायनिक उर्वरकों से खेतों को बचाने विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की थीम “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” रही।
मुख्य अतिथि खंड विकास अधिकारी आलोक कुमार ने कहा कि ग्राम पंचायतें यदि प्लास्टिक प्रदूषण रोकने, वर्षा जल संचयन बढ़ाने और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाएं तो पर्यावरण संरक्षण के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य तैयार किया जा सकता है। उन्होंने पंचायतों से सरकारी सुविधाओं के सदुपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राजदेव चतुर्वेदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर अब गांवों और खेत-खलिहानों तक साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती गर्मी, हीट वेव और जल संकट से ग्रामीण जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक परेशानी मजदूर वर्ग, सफाई कर्मियों और घरेलू महिलाओं को उठानी पड़ रही है। डॉ. एलसी वर्मा ने कहा कि जलवायु संकट से निपटने के लिए गांवों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग धीरे-धीरे कम करने की अपील करते हुए कहा कि ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान लगातार किसानों को जागरूक और प्रशिक्षित कर रहा है। कार्यक्रम में यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत अपने स्तर पर प्लास्टिक के प्रयोग को कम करने, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और जलवायु अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाएगी। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. आदित्य कुमार, डॉ. पवन कुमार आनंद, राजन कुमार, रामचंद्र वर्मा और राजेश वर्मा ने भी पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के वरिष्ठ साथी राजेश कुमार ने किया।
रिपोर्ट-आशीष निषाद

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