मार्टिनगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। प्रयागराज से गोरखपुर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के समय पर्यावरण संरक्षण और सुंदरता के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इन दावों की पोल खोल रही है। हाईवे के निर्माण के दौरान काटे गए विशाल पेड़ों की भरपाई के नाम पर केवल आश्वासन मिले, जो अब पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि बरदह बाजार से लेकर आजमगढ़ तक सड़क के दोनों ओर एक भी विशाल छायादार पेड़ नजर नहीं आता।
हाईवे के चौड़ीकरण के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा सड़क के किनारे पौधे जरूर रोपे गए थे, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही के चलते यह अभियान सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गया। उचित देखभाल और सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण ये पौधे या तो आवारा पशुओं का निवाला बन गए या फिर भीषण गर्मी और पानी के अभाव में सूखकर लकड़ी के ठूंठ बनकर रह गए हैं।
रिपोर्ट-अद्याप्रसाद तिवारी