अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रांतीय आह्वान पर शनिवार को तहसील बूढ़नपुर में लेखपालों ने संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन किया। अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। इसके बाद उपजिलाधिकारी बूढ़नपुर को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
जिलाध्यक्ष दिलीप पाठक ने कहा कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन उनकी कई मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल कार्यों में जीएनएसएस रोवर, लैपटॉप और मोबाइल जैसे तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कराया जा रहा है, इसके बावजूद लेखपाल पद को तकनीकी पद का दर्जा नहीं दिया गया है। उन्होंने भत्तों में बढ़ोतरी की भी मांग की।
तहसील अध्यक्ष विक्रम सिंह और तहसील मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि करीब 2700 लेखपाल अपने गृह जनपद से 400 से 800 किलोमीटर दूर तैनात हैं। उनके अनुसार, पिछले आठ वर्षों से अंतर्मंडलीय स्थानांतरण नहीं हुए हैं। वहीं, दो वर्षों से राजस्व निरीक्षक पद की डीपीसी लंबित है।
लेखपाल संघ ने मांगें पूरी नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। संघ के अनुसार, आठ अक्तूबर से तहसील प्रशासनिक व्हाट्सएप ग्रुपों से लेखपाल बाहर होंगे और आय, जाति, निवास, खसरा तथा फार्मर रजिस्ट्री समेत ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार करेंगे। 10 अक्तूबर को थाना दिवस पर काली पट्टी बांधकर विरोध किया जाएगा। 12 अक्तूबर को तहसील और जिला स्तर पर रक्तदान शिविर, 14 अक्तूबर को जिला मुख्यालय पर मोटरसाइकिल रैली और जिलाधिकारी को ज्ञापन देने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। 17 से 23 अक्तूबर तक सभी तहसीलों में सुबह 10 से शाम चार बजे तक कार्य बहिष्कार और धरना दिया जाएगा। इसके बाद 24 अक्तूबर से जिला मुख्यालय पर संपूर्ण कार्य बहिष्कार के साथ अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
फूलपुर प्रतिनिधि के अनुसार संघ के तहसील अध्यक्ष विशाल सिंह चंदेल और मंत्री विंद्रेश यादव के नेतृत्व में लेखपालों ने धरना दिया। इस मौके पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष नागेंद्र तिवारी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज यादव, उपमंत्री रविशंकर यादव, कोषाध्यक्ष कृष्ण चंद यादव और आडिटर रविकांत यादव आदि मौजूद रहे।
रिपोर्ट-आशीष निषाद/मुन्ना पाण्डेय