फूलपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। तहसील क्षेत्र के गांवों, चट्टी-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों को रोशन करने के लिए विधायक, सांसद, क्षेत्र पंचायत और विधान परिषद सदस्य निधि से लगाई जा रही हाईमास्ट लाइटों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मानक के अनुरूप सामग्री का प्रयोग नहीं होने के कारण अधिकांश हाईमास्ट लाइटें एक वर्ष के भीतर ही खराब होने लगती हैं। कई स्थानों पर तो आधे से अधिक बल्ब रोशनी करना बंद कर चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हाईमास्ट लाइट लगाने के बाद संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था की ओर से नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि टेंडर के समय जिस कंपनी के बल्ब, होल्डर और अन्य उपकरणों का विवरण दिया जाता है, क्या वास्तव में उसी कंपनी की सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जमानत राशि वापस करने से पहले संबंधित अधिकारियों को मौके पर सत्यापन कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हाईमास्ट लाइटें सही ढंग से काम कर रही हैं या नहीं।
फूलपुर ब्लाक परिसर सहित विद्युत परिसर उदपुर में लगी हाईमास्ट लाइटें भी बंद बताई जा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित फर्म से खराब लाइटों की मरम्मत कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
इस संबंध में बीडीओ फूलपुर फूलचंद सरोज ने बताया कि संबंधित फर्म को पत्र लिखकर खराब लाइटों को ठीक कराने के लिए कहा गया है।
रिपोर्ट-पप्पू सिंह/मुन्ना पाण्डेय