आज़मगढ़ (सृष्टिमीडिया)। हिम्मत, उम्मीद और बेहतरीन इलाज की एक मिसाल में, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के डाक्टरों ने जटिल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी के जरिए गंभीर लिवर बीमारी से पीड़ित 52 वर्षीय व्यक्ति की सफलतापूर्वक जान बचाई।
शहर के सीताराम मुहल्ला निवासी अजीज़ुल्लाह खान पिछले 3 वर्षों से हेपेटाइटिस बी के कारण हुई डिकम्पेन्सेटेड क्रॉनिक लिवर डिजीज (सीएलडी) से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिसमें पीलिया, पेट में पानी भरना, लगातार बढ़ा हुआ बिलीरुबिन स्तर, कम प्लेटलेट काउंट और गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण शामिल थे। उन्हें पोर्टल हाइपरटेंशन के कारण बार-बार खून की उल्टियां भी होती थी और उन्हें पोर्टल वेन थ्रॉम्बोसिस यानी आंतों से लिवर तक खून ले जाने वाली मुख्य नस में थक्का भी पाया गया, जिससे उनकी स्थिति और जटिल हो गई। लंबे समय तक इलाज के बावजूद उनकी सेहत लगातार गिरती रही, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और काम करने की क्षमता पर गहरा असर पड़ा।
आखिरी और जीवन बचाने के विकल्प के रूप में, उन्हें डॉ. वलीउल्लाह सिद्दीक़ी, डायरेक्टर, हेपेटो-पैनक्रिएटो-बिलियरी एंड लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ, के पास लिवर ट्रांसप्लांट के लिए रेफर किया गया, जो उनके लिए एकमात्र जीवन रक्षक विकल्प था।
एक साहसी और निस्वार्थ कदम उठाते हुए, उनके 22 वर्ष के बेटे यूसुफ खान, ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान करने का निर्णय लिया। कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, साइकियाट्री, न्यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी सहित कई विशेषज्ञताओं द्वारा विस्तृत जांच के बाद, डोनर और रिसीपिएंट दोनों को इस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त पाया गया। बेटे का लिवर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया जिससे पिता की जान बच गयी।
रिपोर्ट-ज्ञानेन्द्र कुमार