133वीं जयंती पर याद किये गये राहुल सांकृत्यायन

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रानीकीसराय आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। महा पंडित राहुल सांकृत्यायन की 133वीं जयंती जन्म स्थली पन्दहा में मनाई गई। राहुल जी की प्रतिमा पर लोगों ने माल्यार्पण करके नारे लगाए। गोष्ठी में उनके जीवनबृत्तों को याद किया गया।
राहुल जन पुस्तकालय के प्रबंधक राधेश्याम पाठक की अध्यक्षता में आयोजित राहुल के जीवन यात्रा पर गोष्ठी में भाकपा जिला सचिव जितेंद्र हरि पाण्डेय ने राहुल जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राहुल बहुभाषाविद और यात्रा साहित्य के जनक थे। उन्होंने दुर्लभ बौद्ध ग्रंथ और पांडुलिपियां भारत लाई। मानवतावादी और तर्कवादी दृष्टिकोण अपनाया। कहा कि 1994 में राहुल स्मृति मंच द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव व तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने अपनी घोषणा में राहुल जन्म स्थान तक सड़क, स्कूल से लेकर कई घोषणाएं की थीं। बाद में भी कई जन प्रतिनिधियों द्वारा कई बार सड़क की घोषणा की गई जो अब तक कागजों में ही दर्ज है।
राधेश्याम पाठक ने कहा कि घोषणाएं ही केवल होती रही लेकिन स्थली तक जाने वाले नहर मार्ग की दशा वही है। आने वाले शैलानियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। आज तक एक अदद मार्ग नही बन सका।
इस अवसर पर बेचू पाठक, भीमा कन्नौजिया, रामचेत यादव, शीतला पाठक, बंशू यादव, त्रिभुवन पाठक, राम कृपाल, मुखई यादव आदि लोग मौजूद रहे।
इसी क्रम में राहुल पूर्व माध्यमिक विद्यालय मंे आयोजित कार्यक्रम में श्याम बिहारी सिंह यादव ने कृतियों को याद कर कहा कि इसी विद्यालय से शिक्षा अध्ययन कर राहुल सांकृत्यायन ने 36 भाषाओं के ज्ञाता बने, जिन्हें साहित्य का पितामह कहा जाता है। लोगो ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। प्रतियोगिता मंे छात्रो ने भाग लिया। लालबहादुर, किंसराज गौतम, कुमुद भारती, शिवानी यादव, निशा, सुनीता भारती आदि मौजूद थी।
रिपोर्ट- प्रदीप वर्मा

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