खोखला साबित हो रहा शासन के मदद का दावा

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रानीकीसराय आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। कोरोना काल के दौरान बच्चों की शिक्षा के लिए मदद की शासन की योजना फाइलो में कैद हो कर रह गयी है। आवेदन के दो वर्ष बाद भी लोग मदद की राह देख रहे हैं जबकि नाम मात्र लोगो का चयन कर कोरम पूरा कर लिया गया।
कोरोना काल के दौरान अनाथ हुए बच्चों एवं माता पिता में किसी एक की मौत हुए बच्चों को शासन द्वारा शिक्षा के लिए सरकारी मदद की घोषणा की गयी थी। इसके लिए आवेदन भी मांगे गये थे। आवेदक किसी तरह व्लाक और जिला प्रोबेशन कार्यालय का चक्कर काट कर कोरम पूरा किये। बच्चों का भी साक्षात्कार हुआ बावजूद इसके दो वर्ष बाद भी प्रक्रिया फाइलांे में कैद हो कर रह गयी। प्रोबेशन कार्यालय द्वारा यह कह कर वापस कर दिया जाता है कि अभी जांच मंे है और धन भी नहीं है। सवाल ये है कि दो वर्ष तक बच्चे क्या शासन की मदद की राह देखते शिक्षा से वंचित होते। नाम मात्र का ही चयन करना था तो फिर आवेदन की प्रक्रिया में लोगो को क्यों दौड़ाया गया। अभिभावकों का कहना है कि शासन के मदद का दावा खोखला साबित हुआ।
रिपोर्ट-प्रदीप वर्मा

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