आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। किसी को अपनों ने ठुकरा दिया या फिर जिनका कोई अपना नहीं उनके मरने के बाद अपना बनता रहा है सामाजिक संगठन भारत रक्षा दल। वर्ष 2013 से शुरू सिलसिला कोरोना काल में भी नहीं थमा, भले ही गाइडलाइन के कारण संक्षिप्त कर दिया गया हो।
लावारिसों का दाह संस्कार के बाद हर साल पितृ पक्ष में सभी का विधि-विधान से श्राद्ध भी किया जाता है। इसी क्रम में इस साल भी तमसा नदी किनारे राजघाट पर अनजान, अपरिचितों की आत्मा को तृप्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान के साथ श्रद्धा अर्पण किया गया।
राजघाट का कर्मकांड कराने के बाद भारत रक्षा दल के कुंदीगढ़ (कटरा) स्थित केंद्रीय कार्यालय में ब्राह्मणों को भोजन के साथ अंगवस्त्र, बर्तन, दक्षिणा प्रदान करने के बाद सामूहिक भोज शुरू हुआ, जिसमें संगठन से जुड़े लोगों के अलावा सैकड़ों लोगों ने भोजन ग्रहण किया। अनुष्ठान का नेतृत्व करने वाले भारत रक्षा दल के हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव ने कहा कि समाज में किसी की मृत्यु हो जाने पर उनके परिजन अपने रीति रिवाज के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करते हैं लेकिन लावारिस मृतकों को कोई पूछने वाला नहीं होता। मानव काया की दुर्गति हम सभी को देखी नहीं गई तो हम सभी ने लावारिस मृतकों का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया और वर्ष 2013 से निरंतर इस कार्य को किया जा रहा है। अब तक 701 लावारिसों का दाह संस्कार किया जा चुका है। हर दिन के लिए कार्यकर्ता निर्धारित होते हैं और सबसे खास बात यह कि अगर लावारिस के दाह संस्कार के दिन कोई त्योहार भी होता है तो कार्यकर्ता जिम्मेदारी से भागते नहीं हैं। हम जो भी कर पा रहे हैं उसमें कार्यकर्ताओं का समर्पण भाव सबसे महत्वपूर्ण है। इस साल खास बात यह रही कि पूरी व्यवस्था में जिलाध्यक्ष रवि प्रकाश, डा. धीर जी, विपिन गुप्ता, प्रदीप मौर्य, सोनू मिश्रा, दुर्गेश श्रीवास्तव, सचिन, आलोक शर्मा के साथ जावेद अंसारी ने भी सुबह से अपना योगदान दिया।
रिपोर्ट-सुबास लाल/ज्ञानेन्द्र कुमार