आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। नगर के गुरुघाट स्थित श्री रामजानकी मंदिर में संगीतमयी श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। रामकथा का विधिवत शुभारंभ भगवान श्रीराम के पूजन-अर्चन और मंत्रोच्चारण के साथ हुआ।
शाम को शुरू हुए श्रीरामकथा का शुभारंभ करते हुए कथावाचक अंकित चतुर्वेदी महाराज ने कहा कि रामचरित मानस ही जीवन का आधार है। इस गुप्त कथा को भगवान शंकर छिपा कर अपने मन में रखे थे समय आने पर माता पार्वती को यह दुर्लभ कथा सुनाई। जिससे इस कथा का नाम श्रीराम चरित मानस पड़ा। पूज्य तुलसी दास ने इस कथा को भगवान शिव की कृपा से गाने योग्य बनाया इसीलिए इस कथा के लेखक शिव जी तथा कवि तुलसी दास हुए। उन्होने बताया कि रामकथा हर समस्या के समाधान की कथा है। इसी अर्थ में श्रीराम की आपबीती जगबीती बनने की क्षमता रखती है। यही वजह है कि जब दो लोग मिलते हैं तो राम-राम के संबोधन के साथ मिलते हैं, एक व्यक्ति दूसरे को अपनी आपबीती सुनाता है तो उसे रामकहानी कहा जाता है, यानि राम कथा आपबीती कथा है, इसीलिए ये कथा जगबीती बनने की क्षमता रखती है जो जन-जन से जुड़ी है। श्रीराम कथा के श्रवण मात्र से मानव का कल्याण हो जाता है। अंत में भगवान श्रीराम के आरती के साथ कथा को विश्राम दिया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम अध्यक्ष सुभाष चन्द्र तिवारी (कुंदन), मंत्री महंत संजय पांडेय, सहयोगी, कविकांत उपाध्याय, ओमप्रकाश गुप्त, संगीत की प्रतिभा को बिखेरने वाले कलाकार दिनेश, प्रवीण, अजय, हर्ष, चन्द्र प्रकाश सहित भारी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/ज्ञानेन्द्र कुमार