अहिरौला आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। राजकीय महिला महाविद्यालय, अहिरौला में ‘स्वतन्त्रता के 100 वर्ष की ओर बढ़ते हुए भारत में सतत विकास के लिए भविष्य का रोडमैप’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लेकर 2047 तक भारत को आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अपने विचार साझा किए। अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. महेन्द्र प्रकाश ने की। संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड में हुआ, जिसमें ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों माध्यमों से विद्वानों की सहभागिता रही। कार्यक्रम के दौरान संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
प्राचार्य प्रो. महेन्द्र प्रकाश ने कहा कि समय की आवश्यकता एक ऐसे विकसित भारत के निर्माण की है, जो आर्थिक रूप से सशक्त, सामाजिक रूप से समावेशी और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को 2047 के ‘नए भारत’ का निर्माता बताते हुए युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया के प्रो. अभय कुमार ने सतत विकास लक्ष्यों को धरातल पर उतारने और चुनौतियों को अवसर में बदलने पर जोर दिया। बीएचयू के प्रबंध संकाय के प्रो. अमित गौतम ने आर्थिक विकास में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया। एमएसडीयू, आजमगढ़ के प्रो. दिनेश कुमार तिवारी ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति समावेशी और संवेदनशील होनी चाहिए। रामनगर पीजी कॉलेज, बाराबंकी के प्रो. कौशलेंद्र विक्रम मिश्रा तथा मालटारी महाविद्यालय के प्रो. प्रशांत कुमार राय ने स्थानीय संसाधनों के उपयोग, डिजिटल तकनीक, आधुनिक शोध और नवाचार को सतत विकास का आधार बताया।
रिपोर्ट-संतोष चौबे