आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। लोकतंत्र में पत्रकारिता में देश और देश में रहने वाले आम आदमी की आवाज को सदैव ताकत देने का काम किया है किन्तु तथ्य और साक्ष्यविहीन पत्रकारिता सभ्य समाज और व्यक्ति के लिये अवसाद के अवसर भी लेकर आती है।
पत्र प्रतिनिधियों से वार्ता में पूर्व सांसद ने कहा कि 25 जून 2005 को आज तक चौनल ने रात्रि 8.30 बजे ऐसी ही एक तथ्यविहीन और भ्रामक खबर से मेरी सामाजिक प्रतिष्ठा को जानबूझ कर तार-तार करने की मंशा के साथ ’हत्यारा कौन शीर्षक’ से प्राइम टाइम में खबर चलायी गयी, जिसमें निर्मल रुंगटा अपहरण कांड में मेरी ओर इशारा करने का प्रयास किया गया। गौरतलब है कि उक्त बेबुनियाद खबर को संज्ञान में लेते हुये मैने आज तक चौनल के ऊपर आपराधिक व मानहानि का मुकदमा दायर किया। जिसमें चैनल के स्वामी अरुणपुरी, प्रभुचावला व बालकृष्ण को षडयंत्रकर्ता और साजिश रचने का मुल्जिम बनाते हुये विभिन्न धाराओं में मुकदमा दायर किया गया। आज तक चौनल के मालिकान ने अपने ऊपर गिरफ्तारी का बढ़ता दबाव देखकर उच्च न्यायालय प्रयागराज में न्यायमूर्ति के समक्ष शपथपत्र के माध्यम से बिना शर्त ना सिर्फ माफी मांगी बल्कि अपने चैनल पर वादी मुकदमा के मान को हानि पहुंचाने के लिये 17 दिसम्बर और 18 दिसम्बर को प्राइम टाइम पर अपने माफीनामे की 5 बार स्काल चलाने का न्यायालय को लिखित आश्वासन भी दिया। पूर्व सांसद ने कहा भारतीय लोकतंत्र में मीडिया की गरिमा को बनाये रखने के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुये देश के महान विभूतियाँ के क्षमादान की परम्परा को आगे बढ़ाते हुये आपराधिक मामले में आजतक के संचालकों को माफ कर दिया है। उन्होंने साफ किया कि आपराधिक मसले को छोड़कर मानहानि और सामाजिक सरोकार से जुड़े मसले में मुकदमा चलता रहेगा।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/ज्ञानेन्द्र कुमार