अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। एक सप्ताह से बिजली संकट झेल रहे करीब पांच हजार ग्रामीणों को वैकल्पिक व्यवस्था से बिजली मिलने के बाद शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एफआईआर दर्ज होने की भ्रामक सूचना प्रसारित होने से आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण चिश्तिपुर मार्ग पर एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि उन्हें एफआईआर नहीं, बिजली चाहिए। ग्रामीणों ने बिजली विभाग और मामले को लेकर की जा रही बयानबाजी पर नाराजगी जताई।
करीब एक सप्ताह पूर्व आई आंधी-तूफान में चिश्तिपुर, बरदहवा, देहुला गोसाई, कुलुहिया समेत आसपास के गांवों की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। ग्रामीणों के लगातार प्रयास के बाद विद्युत विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नया खंभा लगाकर बिजली आपूर्ति शुरू कराई। विभाग की ओर से बताया गया कि पानी सूखने के बाद मूल व्यवस्था को भी बहाल किया जाएगा। इसी बीच सोशल मीडिया पर ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई किए जाने की खबर प्रसारित होने लगी। इससे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और सैकड़ों लोग चिश्तिपुर मार्ग पर पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे।
ग्रामीणों ने कहा कि वे नियमित रूप से बिजली का बिल जमा करते हैं। ऐसे में एक सप्ताह तक बिजली संकट झेलने के बाद जब वैकल्पिक व्यवस्था से आपूर्ति बहाल हुई तो एफआईआर की खबर से उन्हें और परेशानी हुई। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि “हमें बिजली चाहिए, एफआईआर नहीं।” ग्रामीणों ने कहा कि एफआईआर को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई सूचना की स्थिति स्पष्ट की जाए।
सुभासपा के ब्लॉक अध्यक्ष मनोज कुमार वर्मा, प्रधान रामचेत, पूर्व प्रधान सुभाष चंद्र वर्मा, राधेश्याम कनौजिया, सुनील वर्मा, राजेश वर्मा, पुरुषोत्तम गौड़, बेचू कनौजिया, परदेसी गौड़, पुष्पा देवी, तारा विश्वकर्मा, कौशल्या, नीतू गौड़ और संतराजी आदि ने बिजली संकट को लेकर नाराजगी जताई।
इस संदर्भ में जेई मनोज कुमार वर्मा ने कहा सभी को बिजली आपूर्ति करना हमारी प्राथमिकता है। मजबूरी थी कि पानी में खंभा गिरा था, जिसके लिए मेरे द्वारा व अन्य अधिकारियों द्वारा लिखित व वीडियो बयान दिया गया कि पानी सूख जाने के बाद पुनः खंभा खड़ा कर दिया जाएगा। तब तक के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के अनुसार बिजली व्यवस्था बहाल की गई है और विद्युत आपूर्ति निरंतर बहाल रहेगी।
रिपोर्ट-आशीष निषाद