अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थानीय थाना क्षेत्र के लोहरा गांव में जमीन के विवाद के बीच एक बुजुर्ग महिला की मौत का मामला सामने आया है। मृतका की बेटियों ने अपनी ही बहन के बेटों पर मां को जबरन घर में रखने और समय पर इलाज नहीं कराने का गंभीर आरोप लगाया है। बेटियों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी में हुए समझौते के बावजूद उनकी मां को अस्पताल नहीं पहुंचाया गया। दो दिन तक वे 100 शैय्या अस्पताल में मां के आने का इंतजार करती रहीं, लेकिन इसी दौरान घर पर उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
लोहरा गांव निवासी चौरासी देवी 84 वर्ष पत्नी स्व. रामनवल की छह बेटियां हैं। परिजनों के अनुसार, कुछ समय पहले एक बेटी के बेटों ने चौरासी देवी से कुछ जमीन अपने नाम दानपत्र के जरिये करा ली थी। इसके बाद बची पुश्तैनी जमीन को लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। इसी बीच चौरासी देवी की तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई।
सुक्खीपुर निवासी बेटियां सुदामा देवी और सीता देवी ने आरोप लगाया कि मां की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले 100 शैय्या संयुक्त चिकित्सालय अतरौलिया और फिर जिला अस्पताल अंबेडकर नगर में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इसी दौरान संजय, मनोज और सुखना समेत करीब 10-12 लोग अस्पताल पहुंचे और मां को टांडा पीजीआई में भर्ती कराने की बात कहकर 13 तारीख को अस्पताल से डिस्चार्ज करा ले गए। परंतु कहीं भी इलाज नहीं कराया जिससे मां की मौत हो गयी।
बेटियों ने इसे स्वाभाविक मौत न मानते हुए इलाज से वंचित कर हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। परिजनों का यह भी आरोप है कि महिला की मौत के बाद अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे लोगों को लाठी-डंडों के बल पर भगाने का प्रयास किया गया और शव का आनन-फानन अंतिम संस्कार करने की कोशिश की गई।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
रिपोर्ट-आशीष निषाद