आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। शासन की नीतियों के साथ जब सामाजिक सरोकारों का समन्वय हो जाता है, तो समाज को सही दिशा देने और उसे प्रगतिपथ पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। कहने के बजाय करने में विश्वास रखने वाली सोच ही समाज को आगे ले जाने का कार्य करती है। उक्त उद्गार जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने आज हरिऔध कला केंद्र सभागार में तथागत फाउंडेशन ट्रस्ट एवं जेब्रा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वनवासी मेधा सम्मान पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।
पूर्व जिलाधिकारी एवं भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एनपी सिंह ने कहा कि हर कालखंड और हर संस्कृति में शिक्षा ही वह प्रकाश रही है, जो अंधकार को दूर करने का कार्य करती है। शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति अपने अधिकारों, कर्तव्यों और संभावनाओं को समझते हुए समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकता है। उन्होंने तथागत फाउंडेशन ट्रस्ट की संरचना एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सहित उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में शोषित एवं वंचित समाज से जुड़े वनवासी बच्चों को शिक्षा के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ना ट्रस्ट का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे ‘गिलहरी प्रयास’ का विस्तार से उल्लेख करते हुए समाज के प्रत्येक सजग एवं सक्षम नागरिक से अपने से निचली पायदान पर खड़े जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान आजमगढ़, मऊ एवं बलिया जनपदों में भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबंधित कार्यों को देखने के लिए कमलेश वनवासी को तत्काल प्रभाव से अधिकृत किया गया।
समारोह में वनवासी समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को समाज के महापुरुषों के नाम पर स्थापित छात्रवृत्ति एवं मेधा सम्मान पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उनके शैक्षिक प्रयासों एवं उपलब्धियों के लिए प्रोत्साहित किया गया।
रिपोर्ट-सुबास लाल/ज्ञानेन्द्र कुमार