कठिन फैसलों में दिखती है असली वफादारी

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लालगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। राजनीति में निष्ठा की असली पहचान पद या चुनावी जीत से नहीं, बल्कि कठिन समय में पार्टी के फैसलों के साथ खड़े रहने से होती है। बसपा के वरिष्ठ नेता हरिश्चंद्र गौतम को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच यही चर्चा सामने आ रही है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में संगीता आजाद को लालगंज से बसपा प्रत्याशी बनाए जाने पर कुछ कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक आशंकाएं जताई थीं। इसके बावजूद हरिश्चंद्र गौतम ने व्यक्तिगत राय से ऊपर पार्टी नेतृत्व के निर्णय को रखा और कार्यकर्ताओं से पार्टी प्रत्याशी के साथ मजबूती से खड़े रहने की अपील की। 2022 में आजाद अरिमर्दन को टिकट दिए जाने के दौरान भी उन्होंने पार्टी लाइन का समर्थन किया। बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में दोनों नेताओं के भाजपा में जाने के बाद उस समय जताई गई आशंकाओं पर फिर चर्चा शुरू हुई। अब हरिश्चंद्र गौतम के खिलाफ पार्टी की ओर से लिए गए फैसले को लेकर उनके समर्थकों में नाराजगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से संगठन के लिए ईमानदारी और अनुशासन के साथ काम करने वाले नेताओं के खिलाफ ऐसी कार्रवाई से कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है।
समर्थकों का कहना है कि पद और चुनावी हार-जीत बदलती रहती है, लेकिन संगठन के प्रति निष्ठा और अनुशासन ही कार्यकर्ता की असली पहचान है। वफादारी की बातें बहुत लोग करते हैं, लेकिन कठिन समय में उसे निभाने वाले कम होते हैं। देवगांव के पूर्व सेक्टर अध्यक्ष और बसपा के कार्यकर्ता सूरज पेंटर आदि ने कहा कि इस निर्णय से वह और उनके साथी काफी असमंजस में हैं।
रिपोर्ट-मकसूद अहमद

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