अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। 15 अगस्त सन 1947 को हमारा देश भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था। देश की स्वतंत्रता की खुशी में सरकारी दफ्तरों, ऑफिसों, स्कूलों, कॉलेजों, मदरसों, मस्जिदों, मंदिरों और लगभग हर घर में तिरंगा झंडा फहराया जाता है और मिठाइयां वितरण की जाती हैं। हमें यह स्वतंत्रता इतनी आसानी के साथ नहीं मिली है। बल्कि इसमें हमारे बुजुर्गों की कुर्बानियां शामिल रही हैं। 15 अगस्त हमारे मुल्क की स्वतंत्रता और अनगिनत मुजाहिदीन आजादी की कुर्बानियों की याद ताजा करने का दिन है। उक्त बातें मौलाना मोहम्मद अब्दुल बारी नईमी पेश इमाम जमा मस्जिद अतरौलिया एवं अध्यापक मदरसा अरबिया फैज़ ए नईमी सरैया पहाड़ी ने पत्रकार से बातचीत में कहीं।
उन्होंने कहा कि भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने में मुल्क के हर तबका और हर धर्म के लोगों की कोशिशें और कुर्बानियां शामिल रही हैं। उन्होंने मुल्क को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने में अहम किरदार अदा किया था। अलग-अलग कोशिशों से मुल्क को अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से मुक्त करना नामुमकिन था। हमें हमेशा अपने बुजुर्गों और मुजाहिदीन आजादी की कुर्बानियों को याद रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुल्क की तरक्की खुशहाली के लिए अमन मोहब्बत, भाईचारा, हिंदुस्तान की खूबसूरती और उसकी गंगा जमुनी तहजीब हर धर्म मजहब की एकता में है। मुल्क को मजबूत और खुशहाल बनाने के लिए हर शहरी को कानून के दायरे में रहते हुए ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपना फर्ज अदा करना अनिवार्य है। नई नस्ल और आने वाली पीढ़ी को भारत की स्वतंत्रता की हिस्ट्री और देश पर मर मिटने वाले जियालों की सेवाओं से अवगत कराना हमारी विशेषता होनी चाहिए। 79 साल बीत गए देश 80वां स्वतंत्रता का त्यौहार मना रहा रहा
जिन्होंने देश की स्वतंत्रता की खातिर फांसी के फंदे को चूमना और उस पर झूलना पसंद किया, उन शहीदों के खून की लाली हमारे तिरंगा का विशेष रंग है। हम इसे किसी भी हाल में भूल नहीं सकते। देश पर जब भी आफ़त और मुसीबत आई यहां के जियालों ने अपनी सारी ताकतों को इसे विकास की राह पर लाने के लिए लगा दिए तब जाकर हमारा देश आज़ाद हुआ।
रिपोर्ट-आशीष निषाद