मार्टिनगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। सहायक विकास अधिकारी कृषि मार्टिनगंज राघवेंद्र राय ने बताया कि फसल अवशेष किसान पराली को जलाए नहीं बल्कि खेत में मिलायें और खेत की उर्वरा शक्ति को बढ़ावा दें। पराली जलाने से जहां पर्यावरण प्रदूषण होता है वहीं आवश्यक पोषक तत्वों का नुकसान भी होता है। फसल अवशेष हमारे खेत के लिए भोजन का काम करते हैं जो की खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ उसमें उत्पादित उपज की गुणवत्ता को भी बढ़ाते हैं। फसल अवशेष प्रबंधन पर उन्होंने बताया कि पराली और फसल अवशेष खेतों में मिला दिया जाए और उषा डी कंपोजर खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए रामबाण है। इसका उपयोग किया जाए और खेत की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जाए पराली न जलाया जाए।
रिपोर्ट-अद्याप्रसाद तिवारी