आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। बीज, खाद एवं कीटनाशक विक्रेताओं ने राष्ट्रव्यापी बंदी के समर्थन में 6 सूत्री मांगों को लेकर अपनी दुकानें बंद कर हड़ताल पर रहे।
व्यापारियों का कहना है कि एक से अधिक जनपदों में कारोबार करने पर प्रदेश निदेशालय स्तर से असंवैधानिक तरीके से लाइसेंस लेने की बाध्यता समाप्त हो। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के एक राष्ट्र एक व्यापार, एक लाइसेंस तथा सरलीकरण के सिद्धांतों के विपरीत है। जमाव मानक से कम आने पर असंवैधानिक रूप से लाइसेंस रद्द व निरस्त न करने की नियमानुसार कार्यवाही हो। खाद की डिलीवरी विक्रेता के दुकान तक फोर पहुंचता हो। सीलबंद बोरी/कंटेनर से नमूना लेने के उपरांत अमानक होने पर विक्रेता की जिम्मेदारी न होकर नियमानुसार पैकिंगकर्ता की जिम्मेदारी सुनिश्चित हो। सारथी पोर्टल को समाप्त किया जाय। इसको दुकानदारों द्वारा नहीं चलाया जा सकता क्योंकि उनके पास आर्थिक क्षमता नहीं है कि वह कोई पढ़ा लिखा कर्मचारी वेतन पर रख सके। प्रस्तावित सीड बिल 2025 का सरलीकरण किया जाय। जुर्माना की राशि बहुत अधिक है जो पश्चिमी देशों के मानक के अनुसार है। यह भारतीय परिस्थितियों से मेल नहीं खाता है। परंपरागत स्वदेशी बीज कंपनियों, विक्रेताओं के लिए इतना ज्यादा नियम कानून बना दिए हैं कि उसके मानक पर वह नहीं उतर पाएंगे तथा सभी बंद हो जायेंगे। इस बिल से बहुराष्ट्रीय विदेशी कंपिनयों को ही लाभ प्राप्त होगा। उनका एकाधिकार कायम होगा जो प्रधानमंत्री के स्वदेशी विचारधारा को कमजोर करता है।
इस अवसर पर शकील अहमद, सुरेश प्रताप वर्मा, योगेंद्र वर्मा, वसीम अहमद, देवेंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।
रिपोर्ट-सुबास लाल