मुबारकपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। विकास की बड़ी योजनाएं जब जमीनी हकीकत से कट जाती हैं, तो करोड़ों की लागत भी बेअसर साबित होती है। तमसा नदी पर सिकंदरपुर-नूरुद्दीनपुर घाट के बीच बना लगभग 20 करोड़ रुपये का पुल इसका ताजा उदाहरण है, जो तैयार होने के दो साल बाद भी अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है।
वर्ष 2021 में शुरू हुआ यह पुल 2024 के मध्य में बनकर तैयार हो गया, लेकिन अधूरे संपर्क मार्ग ने इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुल के एक छोर, मुबारकपुर की ओर, सड़क अपेक्षाकृत चौड़ी और सुगम है, जबकि दूसरी ओर कुछ ही दूरी पर सड़क इतनी संकरी हो जाती है कि छोटे चार पहिया वाहन भी मुश्किल से निकल पाते हैं। बाइक सवारों को कई बार खेतों का सहारा लेना पड़ता है, जबकि बड़े वाहन जैसे ट्रक, बस आदि की आवाजाही पूरी तरह ठप है।
सड़क की इसी संकरी स्थिति के कारण सबसे गंभीर समस्या स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सामने आ रही है। स्कूल वैन और छोटे वाहन जब इस मार्ग से गुजरते हैं, तो हर समय हादसे का खतरा बना रहता है, जिससे अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक तरफ लगभग 800 मीटर तक सड़क का चौड़ीकरण कर उसे मुख्य मार्ग से जोड़ दिया गया है, जबकि सगड़ी विधानसभा क्षेत्र की ओर महज 200 मीटर तक ही निर्माण कार्य हुआ है। इसके चलते वाहन चालकों को गांव की तंग गलियों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे आए दिन दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर करीब एक किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण कर इसे सीधे आजमगढ़-गोरखपुर मुख्य मार्ग से जोड़ दिया जाए, तो यह पुल क्षेत्र के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है। खास बात यह है कि यहां पहले से ही चकरोड मौजूद है, जिससे भूमि अधिग्रहण की समस्या भी काफी हद तक आसान हो सकती है।
यह पुल केवल आवागमन का साधन ही नहीं, बल्कि धार्मिक और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से भी अहम है। बाबा भैरोदास धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक सुगम मार्ग बन सकता है। वहीं, सरयू नदी पर निर्माणाधीन पुल के पूरा होने के बाद यह रास्ता आजमगढ़ को गोला बाजार और गोरखपुर से सीधे जोड़ते हुए करीब 30 किलोमीटर की दूरी भी कम कर सकता है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार प्रशासन को ज्ञापन देकर इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। लोगों का आरोप है कि योजना कागजों तक सीमित रह गई है और जमीनी स्तर पर समुचित क्रियान्वयन नहीं हुआ।
अब क्षेत्रवासियों का सब्र टूटने लगा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है सगड़ी तहसील के नुरुद्दीनपुर गांव की बची हुई जमीन का अधिग्रहण कर संपर्क मार्ग को दोनों ओर से समान रूप से विकसित किया जाए और इसे मुख्य मार्ग से जोड़ा जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अब सवाल यही है कि क्या करोड़ों की लागत से बना यह पुल अपनी पूरी उपयोगिता हासिल कर पाएगा, या फिर अधूरे विकास की मिसाल बनकर यूं ही खड़ा रहेगा।
रिपोर्ट-मनीष श्रीवास्तव