आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। इतिहास विभाग के शोधार्थी के छात्र पप्पू गिरि को पी-एच.डी. शोध मौखिकी परीक्षा पास करने के उपरांत विशेषज्ञों ने उनके इस कार्य को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को समझने के लिए एक मील का पत्थर बताते हुए उन्हें ‘डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी’ की उपाधि हेतु अपनी संस्तुति प्रदान किए जाने से हर्ष व्याप्त है। उनके शोध का विषय “भारत में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का ऐतिहासिक अध्ययनः उनकी कार्यप्रणाली और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर उनके प्रभाव (1883-1937)“ रहा।
श्री गिरी वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज, आजमगढ़ के इतिहास विभाग के शोधार्थी की पी-एच०डी० शोध मौखिकी परीक्षा सफलतापूर्वक पूर्ण किया हैं, पप्पू गिरि ने अपना यह गहन शोध कार्य इतिहास विभाग के प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर सौम्य सेनगुप्ता के कुशल एवं सक्षम मार्गदर्शन में पूर्ण किया है। इस अवसर पर बाह्य परीक्षक के रूप में प्रोफेसर सत्य नारायण वर्मा उपस्थित रहे। बाहरी विशेषज्ञ गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज सेवापुरी वाराणसी के प्रोफेसर सत्य नारायण वर्मा के समक्ष पप्पू गिरि ने अपने शोध प्रबंध का प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया जिसमें उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का नए दृष्टिकोण से विश्लेषण किया है। उनके कार्य की मौलिकता और शोध प्रविधि की विशेष सराहना करते हुए उन्हें डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की उपाधि हेतु अनुशंसित किया।
प्रोफेसर सत्य नारायण वर्मा और शोध समिति ने शोध की गुणवत्ता, ऐतिहासिक तथ्यों के नवीन विश्लेषण और पप्पू गिरि के कठिन परिश्रम की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्हें ’डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी’ की उपाधि हेतु अपनी संस्तुति प्रदान की। इस बड़ी सफलता पर डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज, आजमगढ़ के प्रबंधक आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, प्राचार्य प्रोफेसर प्रेम चंद्र यादव एवं प्रोफेसर सौम्य सेनगुप्ता ने पप्पू गिरि को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल शैक्षणिक भविष्य की कामना की।
रिपोर्ट-दीपू खरवार