मार्टिनगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। रमजान इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र बरकतों वाला महीना है। यह केवल रोजा रखने तक सीमित नहीं बल्कि तरक्की आत्म अनुशासन और इंसानियत की सेवा का गहरा संदेश देता है। उक्त बातें रिटायर्ड अध्यापक अली मोहम्मद अंसारी ने प्रेस को जारी एक बयान में कही।
उन्होंने बताया कि यह महीना हर आदमी को अपने अंदर देखने गलतियों से तौबा करने और अल्लाह से अपने रिश्ते को मजबूत बनाने की प्रेरणा देता है। रोजा सब्र, संयम और आत्म नियंत्रण का एक ऐसा प्रशिक्षण है जो इंसान को बेहतर चरित्र और सकारात्मक सोच की ओर ले जाता है। रोजा रखने से भूख और प्यास का एहसास होता है जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों के प्रति हमदर्दी बढ़ती है। यही वजह है कि रमजान में जकात सड़का और खैरात की भावना तेज हो जाती है और समाज में सहयोग तथा बराबरी का वातावरण बनता है। कुरान की तिलावत की नमाज और दुआओं के जरिए आदमी आध्यात्मिक सुकून पता है। आज जब दुनिया के कई हिस्सों जैसे इसराइल, फलस्तीन, तुर्की, सीरिया, ईरान, रूस, यूक्रेन समेत कुछ अफ्रीकी देशों में जंग या जंग जैसे हालात बने हुए हैं, रमजान का पैगाम और भी प्रासंगिक हो जाता है। यह महीना बताता है कि ताकत का असली रूप बदले और विनाश में नहीं बल्कि शब्द, संवाद और इंसानियत की हिफाजत में है। रोजा इंसान को गुस्से पर काबू रखना, माफी को अपनाना और नफरत की जगह रहमत को चुनना सिखाता है।
रिपोर्ट-अद्याप्रसाद तिवारी