मार्टिनगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। रमजान अल्लाह की इबादत का महीना है अल्लाह चाहता है कि उसका बंदा पूरी दुनिया के लिए आदर्श बने। इंसान अपने सोच विचार व्यवहार कार्य सभी अच्छे होने का प्रमाण दे। रामजान ऐसा बनने के लिए प्रशिक्षण देता है। अपना मूल्यांकन करने के बाद इंसान बेहतर बनने का प्राण खुद से ले। बुराइयों से बचे, गुस्सा न करें, किसी को तकलीफ न पहुंचाये।
अली मोहम्मद सेवा निवृत्त अध्यापक ने बताया कि रमजान में किसी को तकलीफ न पहुंचाएं, सबका सम्मान करें, झूठ न बोलें। जरूरतमंद की मदद करें, गरीब-अमीर, काले-गोरे, ऊंच-नीच का अंतर न करें क्योंकि अल्लाह के घर मस्जिद में सभी एक साथ एक ही कतार में खड़े होकर उसके समक्ष समर्पण करते हैं। अपने भीतर की बुराइयों को खत्म करें किसी के बारे में बुरा न सोचें। मन में बुरे विचार न लाएं सच्चाई का जो रास्ता अल्लाह ने कुरान शरीफ में बताया है उस पर चलें। उन्होंने बताया कि अंतिम पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की व्यावहारिकता को जीवन में अपनायें। हर वर्ष रमजान इसीलिए आता है।
रिपोर्ट-अद्याप्रसाद तिवारी