ईश्वर के प्रति विनम्रता और श्रद्वा से मोक्ष सभंव: पं.श्रवण कुमार

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रानी की सराय आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थानीय कस्बे के रानी पोखरा स्थित गुरुधाम पर चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा मंे कथा वाचक पं.श्रवण कुमार महाराज ने राजा परीक्षित श्राप और सुकदेव आगमन वर्णन में कहा कि ईश्वर के प्रति विनम्रता और श्रद्वा से मोक्ष सभंव है।
भागवत पुराण में वर्णित कथा मंे कहा कि राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषि द्वारा तक्षक नाग के काटने का 7 दिवसीय श्राप मिला, जिसके बाद उन्होंने भोग-विलास छोड़कर गंगा किनारे प्राण त्यागने का निश्चय किया। इस दौरान ऋषि शुकदेव का आगमन हुआ, जिन्होंने परीक्षित को ज्ञान प्रदान किया और श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा सुनाई, जिससे राजा को मोक्ष प्राप्त हुआ।
अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु-उत्तरा के पुत्र परीक्षित एक बार जंगल में शिकार खेलते समय प्यासे थे, तब उन्होंने शमीक ऋषि को ध्यानमग्न देखा। राजा ने पानी मांगा पर ऋषि मौन रहे। क्रोधित होकर राजा ने एक मरा हुआ सांप उनके गले में डाल दिया। ऋषि के पुत्र श्रृंगी ने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को श्राप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से तुम्हारी मृत्यु होगी। अपनी भूल का आभास होने पर राजा परीक्षित ने प्रायश्चित के रूप में राज-पाट छोड़ दिया और गंगा किनारे अनशन पर बैठ गए।
राजा की मुक्ति के लिए सभी ऋषि-मुनि एकत्रित हुए, तभी मात्र 16 वर्ष के शुकदेव जी (ऋषि वेदव्यास के पुत्र) वहां पहुंचे। राजा परीक्षित ने उनसे मोक्ष का मार्ग पूछा। शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद् भागवत महापुराण सुनाया। इस सात दिवसीय कथा के श्रवण से राजा परीक्षित को ब्रह्मज्ञान हुआ और वे सांसारिक बंधनों से मुक्त हो गए, जिससे उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ।
रिपोर्ट-प्रदीप वर्मा

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