सृष्टिमीडिया आजमगढ़। जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने बताया कि आजादी का अमृत महोत्सव ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’14 अगस्त को मनाये जाने के सम्बन्ध में निर्देश दिये गये है।
जिलाधिकारी ने बताया कि आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए अपनी प्रिय मातृ भूमि के उन बेटे एवं बेटियों को नमन करते हैं, जिनको भारत विभाजन के दौरान अपने प्राण न्योछावर करने पड़े थे, ऐसे लोगों की याद में तथा भारत की वर्तमान और भावी पीढ़ियों को विभाजन के दौरान लोगों द्वारा सही गयी यातना एवं वेदना का स्मरण दिलाने के लिए 14 अगस्त को ‘‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’’ के रूप में मनाये जाने का निर्णय लिया गया है।
देश का विभाजन किसी विभीषिका से कम नहीं था। भारत के लाखों लोगों ने बलिदान देकर आजादी प्राप्त की थी, ऐसे समय पर देश को दो दुकड़ों में बट जाने का दर्द आज भी लाखों परिवारों में एक गहरे जख्म की तरह घर कर गया है। इसी समय बंगाल का भी विभाजन हुआ, जिसमें बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया था, जो सन् 1971 में बांग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। भारत के इस भौगोलिक बटवारे में देश के लोगों को सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा मानसिक रूप से झकझोर दिया था। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें न सिर्फ भेद भाव, वैमनस्य एवं दुरभावना को खत्म करने की याद दिलायेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानव सशक्तिकरण की प्रेरणा मिलेगी। उन्होने बताया कि जनपद में भारत पाकिस्तान विभाजन विभीषिका से जुड़ी हुई फिल्मों, डाक्यूमेंट्री को शरणार्थी बस्तियों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन किया जायेगा। स्थानीय प्रकाशकों, पुस्तक विक्रेताओं के सहयोग से सन् 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन विभीषिका से जुड़ी पुस्तकों की प्रदर्शनी लगायी जायेगी।
रिपोर्ट- प्रमोद यादव