विंध्याचल के गैपुरा में सड़क पर मिले अधिवक्ता, हाथ-पैर भी बंधे थे

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पुलिस ने युवक को बंधन मुक्त कर थाना पर ले आई

मीरजापुर (सृष्टि मीडिया)। विंध्याचल के गैपुरा में लावारिस और बंधे हुए हालात में मिले हाईकोर्ट के अधिवक्ता को प्रयागराज पुलिस के हवाले कर दिया गया। आरोप है कि आशुतोष द्विवेदी पुत्र अश्वनी का हाथ पैर बांधकर फेंक दिया गया था। जिसे गैपुरा में ग्रामीणों ने देखा। उसकी हालत गंभीर होने के बावजूद किसी ने भी उसके बंधे हाथ को नहीं खोला। मौके पर पहुंची पुलिस ने युवक को बंधन मुक्त कर थाना पर ले आई।

पुलिस ने परिजनों को दी जानकारी

इसकी जानकारी प्रयागराज पुलिस के साथ ही मांडा निवासी उनके परिजनों को दी गई। थाना में परिवार के लोगों को देख अधिवक्ता गले मिलकर रो पड़े। पुलिस नामजद तहरीर मिलने के बाद जांच में जुटी है। पुलिस द्वारा मुक्त कराकर थाना लाए जाने पर अधिवक्ता आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि 19 जनवरी को शाम करीब 5:30 बजे हाईकोर्ट से अपने घर के लिए निकले थे। पनाश पुल के पास कुछ व्यक्तियों ने उन्हें अगवा कर लिया। मंगलवार की आधी रात को मृतक जानकर अपहरणकर्ता उन्हें गैपुरा चौकी के पास फेंक कर निकल गए। होश में आने पर उनकी आवाज सुनकर ग्रामीण जुटे। पीड़ित ने आपबीती के साथ ही अपना नाम पता बताया। इस दौरान चक्कर आने की शिकायत भी की। लेकिन किसी ने भी उनका बंधा हाथ नहीं खोला।

अचेत हो गए थे अधिवक्ता

मीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्हें बन्धन मुक्त कराया। इसके बाद पुलिस उन्हें थाने पर ले कर पहुंची। अधिवक्ता ने बताया कि मुझे अरुण कुमार तिवारी, वीरेंद्र तिवारी और विनय दुबे ने किडनैप कर लिया था। इसके बाद मुझे मरा हुआ समझ फेंक कर भाग गए। अपहरण के दौरान मेरे सिर पर वार किया गया। जिन लोगों ने मेरे सिर पर वार किया था उन लोगों के चेहरे से मैं वाकिफ हूं। हमले के कारण मैं अचेत हो गया। मुझे कुछ भी याद नहीं। अचेतावस्था में कहां रखा गया मुझे कुछ भी याद नहीं है। विंध्याचल पुलिस ने प्रयागराज के करछना पुलिस को सौंप दिया।

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