अहरौला आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार देर शाम पूजा-अनुष्ठान कराने पहुंचे दो कर्मकांडी पंडितों की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और तनाव का माहौल है। मृतकों में गोझा गांव निवासी कर्मकांड के विद्वान अखिलेश मिश्रा 55 वर्ष और इब्राहिमपुर निवासी महेंद्र पाठक शामिल हैं। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव उनके घर पहुंचे तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अखिलेश मिश्रा का अंतिम संस्कार अंबेडकरनगर जिले के कम्हरिया घाट पर, जबकि महेंद्र पाठक का अंतिम संस्कार दुर्वासा धाम पर किए जाने की तैयारी है।
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सरल स्वभाव और कर्मकांड में थी अखिलेश मिश्रा की पहचान
अहरौला (आजमगढ़)। गोझा गांव निवासी अखिलेश मिश्रा पुत्र स्व. लालजी धर क्षेत्र में पूजा-पाठ और कर्मकांड कराने के लिए काफी प्रसिद्ध थे। ग्रामीणों के अनुसार उनका स्वभाव बेहद सरल और मिलनसार था। वह विवादों से दूर रहकर अपने काम से काम रखते थे। कर्मकांड के क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान थी और आजमगढ़ के साथ-साथ आसपास के कई जिलों से भी लोग उन्हें पूजा-अनुष्ठान कराने के लिए बुलाते थे।
परिजनों के अनुसार शंभूपुर में पूजा-अनुष्ठान कराने के लिए अखिलेश मिश्रा के पास पहले भी कई बार प्रस्ताव आया था, लेकिन उन्होंने वहां जाने से मना कर दिया था। इस बार वह अनुष्ठान कराने के लिए शंभूपुर पहुंचे थे। उनके साथ उनका छोटा बेटा हिमांशु भी गया था। घटना के दौरान हिमांशु किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकल गया। अखिलेश मिश्रा चार संतानों के पिता थे। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा अहमदाबाद में आईआईटी की तैयारी कर रहा है। अभी किसी भी बच्चे की शादी नहीं हुई है। पिता की हत्या की खबर के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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मिलनसार थे महेंद्र पाठक, किसी से नहीं लेते थे विवाद
अहरौला (आजमगढ़)। इब्राहिमपुर निवासी महेंद्र पाठक भी पूजा-पाठ और कर्मकांड कराकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटियां और एक बेटा है। उनका बड़ा बेटा रोजगार के सिलसिले में घर से बाहर गया हुआ था। घर पर परिवार के साथ महेंद्र पाठक ही कर्मकांड के कार्य से जीविकोपार्जन करते थे।
ग्रामीणों के अनुसार महेंद्र पाठक काफी मिलनसार और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। वह किसी से विवाद नहीं करते थे। ग्रामीणों ने बताया कि यदि कोई उनसे कुछ कह भी देता था तो वह बात को बढ़ाने के बजाय ‘चलो ठीक है’ कहकर वहां से निकल जाते थे। ग्रामीणों ने बताया कि महेंद्र पाठक के निधन से परिवार ने अपना सहारा खो दिया है। पिता का साया उठने से पूरा परिवार बिखर गया है। उनका स्वभाव ऐसा था कि गांव में हर व्यक्ति से उनका अपनापन था। उनकी मौत की खबर से ग्रामीण भी स्तब्ध हैं।
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मौसेरे भाई थे दोनों पंडित, अक्सर साथ करते थे अनुष्ठान
अहरौला (आजमगढ़)। परिजनों के अनुसार महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा मौसेरे भाई थे। दोनों अक्सर साथ में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान कराने के लिए जाते थे। मंगलवार को भी दोनों शंभूपुर में अनुष्ठान कराने पहुंचे थे, जहां गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचे और मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया।
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सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार की तैयारी
अहरौला (आजमगढ़)। शव पहुंचने की सूचना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। घर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रमुख प्रतिनिधि संतोष यादव ने भी घर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया।
मौके पर क्षेत्राधिकारी विजय कुमार सिंह गौर, क्षेत्राधिकारी कौस्तुभ त्रिपाठी समेत कई थानों की पुलिस फोर्स मौजूद रही। पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की तैयारियां कराई गईं। शंभूपुर में हुई दोहरी हत्या के बाद इलाके में तनाव और शोक का माहौल बना हुआ है। दोनों परिवारों के लिए यह घटना अपूरणीय क्षति बन गई है।
रिपोर्ट-संतोष चौबे