बिलरियागंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थाानीय क्षेत्र के भैंसहा गांव में चल रहे श्री शतचण्डी महायज्ञ व श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में शुक्रवार को प्रवचन करते हुए कथा वाचक पंडित राघवेन्द्र शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन है।
उन्हांेने कहा कि यह कथा बड़े भाग्य से सुनने को मिलती है। इसलिए जब भी समय मिले कथा में सुनाए गए प्रसंगों को सुनकर अपने जीवन में आत्मसात करें, इससे मन को शांति भी मिलेगी और कल्याण होगा। कलयुग में केवल कृष्ण का नाम ही आधार है जो भवसागर से पार लगाते हैं। परमात्मा को केवल भक्ति और श्रद्धा से पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन इस संसार का नियम है। यह संसार परिवर्तनशील है, जिस प्रकार एक वृक्ष से पुराने पत्ते गिरने पर नए पत्तों का जन्म होता है, इसी प्रकार मनुष्य अपना पुराना शरीर त्यागकर नया शरीर धारण करता है।
ज्ञान यज्ञ में भक्तगण बाल कृष्ण गोपाल की लीलाओं को सुन आनंद से झूम रहे थे। शुक्रवार को श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भगवाताचार्य ने कृष्ण की बाल लीलाओं का व गोवर्धन पूजा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बाल गोपाल ने अपनी अठखेलियों से अपने बाल स्वभाव के तहत मंद-मंद मुस्कान व तुतलाती भाषा से सबका मन मोह रखा था। उन्होंने अपने सखाओं संग मटकी फोड़ कर चोरी छुपे माखन खात हुए यशोदा मैया एवं गोपियों को अपनी शरारतों से प्रेम व वात्सल्य से बांधे रखा।कृष्ण ने अपनी अन्य लीलाओं से पूतना, बकासुर, कालिया नाग, कंस जैसे राक्षसों का वध करते हुए अवतरण को सार्थक किया तथा धर्म का प्रकाश फैलाया। साथ ही गोवर्धन महाराज की पूजा हेतु उससे संबंधित पूरे वृतान्त को भी उपस्थित भक्तगणों को बताया। इस अवसर पर भक्तों ने छप्पन भोगों का अर्पण किया और झांकियों सहित धूमधाम से भगवान गोवर्धन की पूजा-अर्चन की गयी।
रिपोर्ट-तारकेश्वर मिश्र