आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। माटीकला महोत्सव केवल मिट्टी से बने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री का मंच नहीं, बल्कि उन कारीगरों के संघर्ष, सपनों और सफलता की कहानियों को सामने लाने का भी प्रयास है, जिनके हाथों ने मिट्टी को कला और कला को पहचान दी है। इसी कड़ी में महोत्सव की विशेष श्रृंखला ‘कारीगरों के किस्से: मिट्टी से मुकाम तक’ के अंतर्गत निजामाबाद निवासी राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिल्पकार सोहित प्रजापति की प्रेरक सफलता गाथा प्रस्तुत की जा रही है।
सोहित प्रजापति की कहानी संघर्ष से सफलता तक के असाधारण सफर की कहानी है। कभी परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण मुंबई में भेलपुरी बेचकर और छोटे-मोटे कार्य करके आजीविका चलाने वाले सोहित ने अपनी मिट्टी और पुश्तैनी कला से नाता नहीं तोड़ा। निजामाबाद की विश्वप्रसिद्ध ब्लैक पॉटरी कला से जुड़े अपने पारिवारिक हुनर को उन्होंने अपनी पहचान बनाने का माध्यम बनाया।
पारिवारिक परिस्थितियों और रोजगार की तलाश में उन्हें मुंबई जाना पड़ा, लेकिन मन अपनी मिट्टी और पारंपरिक शिल्प में ही लगा रहा। अंततः वह वापस निजामाबाद लौटे और अपने पिता के साथ ब्लैक पॉटरी के कार्य में जुट गए। सीमित संसाधनों और बाजार की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने हुनर को निखारने तथा पारंपरिक कला को नए बाजारों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
इस यात्रा में जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत एवं आरएनएचडी के चेयरमैन शशिकांत मिश्रा के मार्गदर्शन और सहयोग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न राष्ट्रीय प्रदर्शनियों, शिल्प मेलों और लाइव डेमो के माध्यम से उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिली। उनकी प्रतिभा का सम्मान राज्य स्तर पर भी हुआ। उन्हें वर्ष 2011-12, 2012-13 एवं 2013-14 में राज्य दक्षता पुरस्कार तथा वर्ष 2015 में राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 2015 में उन्हें भारतीय पारंपरिक शिल्पकला का प्रदर्शन करने के लिए स्विट्जरलैंड जाने का अवसर मिला। उनकी उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए 9 दिसंबर 2016 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
रिपोर्ट-सुबास लाल