रानीकीसराय आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। अरुणांचल प्रदेश मंे बाढ़ मंे लापता सेना के जवान का अस्थि कलश आने पर पंद्रह किलोमीटर सैन्य सम्मान के साथ शव यात्रा निकाली गई। इस दौरान बाइक सवार युवा भारत माता के जयघोष करते रहे। शवयात्रा शंकरपुर चेकपोस्ट से जवान के घर पहुंची यहां से राजघाट पहुंची।
सिधारी थाना क्षेत्र के मुहमदल्ला गांव निवासी उपेन्द्र यादव वर्ष 2005 मंे सेना मंे हवलदार पद पर भर्ती हुए थे। इन दिनो उनकी तैनाती अरुणांचल प्रदेश के बैली जनपद के पशुपाली कैंप में थी। 14 अगस्त की रात आई बाढ़ की चपेट मंे सेना का कैंप भी आ गया। सेना के शेल्टर बहने से उसमंे ग्रेनोडियर के सात जवान बह गये। सूचना मिलते ही सेना रेस्क्यू कर दो जवानों को तत्काल बचा लिया जबकि पांच लापता थे। बाढ में लापता होने से पूरा परिवार व्यथित था। बडे़ भाई रविंद्र से दिन में नायब सूबेदार के मोबाइल पर फोन पर बातचीत से वहां के हालात की जानकारी मिलती थी।
जवान उपेंद्र यादव का विवाह निजामाबाद थाने के बड़ागांव में वर्ष 2007 मंे निर्मला देवी के साथ हुआ था। दस वर्षीय पुत्र श्रेयांश और एक चौदह वर्षीया पुत्री जान्हवी है। उपेंद्र का पुश्तैनी मकान मुहमदल्ला गांव मंे है जबकि हाल ही मंे सिधारी थाने के मुसेपुर मंे मकान बनवा कर पत्नी बच्चों के साथ रहते हैं। तकरीबन ढाई माह के इंतजार के बाद डीएनए से शव की पहचान होने के बाद पुष्टि हुई। घर पर सूचना मिलते ही कोहराम मच गया। बुधवार को दिन मंे क्षेत्र के युवाओं का हुजूम पहले से शंकरपुर चेकपोस्ट पहुंच गया था। यहां से सेना के वाहन से जवान की राजकीय सम्मान के साथ शव यात्रा निकली। युवा वाहन के आगे भारत माता का जयघोष कर रहे थे। शव मोहम्मदल्ला गांव मंे पहुंचा यहां मौजूद स्वजन के रोने से सभी की आंखें नम हो गई। यहां से अस्थि कलश राजघाट पहुंचा। जहां अंतिम संस्कार हुआ।
रिपोर्ट-प्रदीप वर्मा