कप्तानगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में अक्टूबर माह को डिस्लेक्सिया जागरूकता माह के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के प्राचार्य चंदन प्रसाद भारती के मार्गदर्शन में तथा कार्यक्रम समन्वयक निरूपमा गुप्ता प्रवक्ता, काउंसलर एवं मनोवैज्ञानिक के नेतृत्व में समस्त डायट प्रवक्ताओं एवं संस्थान के सदस्यों के सहयोग से किया गया।
इस अवसर पर डीएलएड प्रशिक्षुओं एवं बेसिक शिक्षा के शिक्षकों को डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पोस्टर निर्माण, जागरूकता रैली, सेमिनार एवं गो रेड टू ऑफिस जैसी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के माध्यम से डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों की सीखने-संबंधी कठिनाइयों को समझने तथा उनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि डिस्लेक्सिया कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता है, जिसमें बच्चों को पढ़ने, लिखने एवं शब्दों को पहचानने में सामान्य बच्चों की अपेक्षा अधिक कठिनाई हो सकती है। इसका बुद्धिलब्धि (आईक्यू) से सीधा संबंध नहीं है। डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों की बुद्धिलब्धि सामान्य अथवा सामान्य से अधिक भी हो सकती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर पहचान, उचित शिक्षण पद्धति, निरंतर अभ्यास तथा शिक्षकों एवं अभिभावकों के सहयोग से ऐसे बच्चों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे बच्चों की आवश्यकताओं के प्रति जागरूक करना तथा उनके लिए समावेशी एवं सहयोगात्मक शिक्षण वातावरण तैयार करना रहा, जिससे वे भी आत्मविश्वास के साथ जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें।
रिपोर्ट-विजय कुमार