फूलपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। रबी की बुवाई के सीजन में साधन सहकारी समितियों पर डीएपी और एनपीके उर्वरक उपलब्ध नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरसों, चना, मटर और आलू की बुवाई के लिए किसान खाद की तलाश में सरकारी गोदामों के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं, किसानों का आरोप है कि निजी उर्वरक विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेच रहे हैं।
किसानों के मुताबिक, साधन सहकारी समितियों पर पहुंचने पर न तो सचिव मिलते हैं और न ही अन्य कर्मचारी, जो खाद की उपलब्धता के बारे में जानकारी दे सकें। इससे किसानों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि डीएपी और एनपीके की अगली खेप कब आएगी। मजबूरी में उन्हें निजी दुकानों से महंगे दाम पर उर्वरक खरीदना पड़ रहा है।
किसानों का आरोप है कि कुछ दुकानदार डीएपी की बोरी 1800 रुपये और एनपीके की बोरी 1500 रुपये में बेच रहे हैं। किसान मनीष, मोहम्मद अनवर, मोहम्मद अंजर, दशरथ पाल, दिनेश, रामराज, अजय पाल, रमेश पाल, बहादुर यादव और बतीस यादव समेत अन्य किसानों का कहना है कि रबी और खरीफ, दोनों सीजन में समय से सरकारी गोदामों पर खाद उपलब्ध नहीं हो पाती। उनका आरोप है कि जब तक समितियों पर उर्वरक पहुंचती है, तब तक किसानों को निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ती है।
किसानों के अनुसार, न्याय पंचायत स्तर पर बनी कनेरी, बक्सपुर और मिजवां समेत कई समितियों के गोदामों पर खाद उपलब्ध नहीं है। सदरपुर, बरौली और सुदनीपुर की समितियों पर खाद मिलने पर आसपास के गांवों के साथ पवई ब्लाक के किसान भी पहुंचते हैं। इससे खाद पाने के लिए किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ता है। किसानों ने महंगे दाम पर मिलावटी खाद मिलने की आशंका भी जताई है।
किसानों ने जिला प्रशासन से सरकारी समितियों पर समय से उर्वरक उपलब्ध कराने, निजी दुकानों पर स्टॉक और निर्धारित मूल्य का रेट बोर्ड लगवाने तथा अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी हरिकेश मालवीय ने बताया कि जिले में उर्वरक उपलब्ध है। निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचने की शिकायतों की एडीओ एजी से जांच कराई जाएगी। कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट-पप्पू सिंह/मुन्ना पाण्डेय