मूक अभिनय प्राचीन भारतीय कला: राजकुमार शाह

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आज़मगढ़। रंगमंच के क्षेत्र में अग्रणी संस्था समूहन कला संस्थान द्वारा प्रतिभा निकेतन स्कूल में विद्यार्थियों के लिए ‘‘मूक-अभिनय’’ का प्रदर्शन प्रख्यात माइमविधा के कलाकार राजकुमार शाह ने किया। मूकाभिनय रंगमंच की प्राचीन शास्त्रीय विधा है, परन्तु आधुनिक समय में भारत में इसका प्रसार और प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम रहा है। यहां तक की इसके संदर्भ में लोगों की धारणा यूरोपियन आर्ट के रूप में रही है, जो सही नहीं है। वास्तव में मूकाभिनय के संदर्भ हजारों वर्ष पूर्व से आचार्य भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में उपलब्ध है। इसके सभी पहलुओं पर विस्तृत वर्णन नाट्यशास्त्र में होना इस बात का प्रमाण है कि यह प्राचीन भारतीय कला है।
इस प्रस्तुति में काल्पनिक वस्तुओं के साथ और शरीर की शैलीकृत मूवमेंट को सभी लोग अचंभित होकर देखते रहे। प्रस्तुति में शामिल गतिविधियों में रस्सी और सीढ़ियों पर चढ़ना, विभिन्न प्रकार की चाल संबघी गतिविधियों और काल्पनिक वस्तुओं का प्रयोग सभी के लिए अत्यंत रोचक रहा। प्रस्तुति के बाद छात्रों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के क्रम में राजकुमार शाह ने बताया कि मूकाभिनय में काल्पनिक वस्तु के साथ कार्य करने की अवधारणा नाट्यधर्मी स्वरूप का शास्त्रीय अंग है। मूकाभिनय में नाट्य धर्मी प्रयोगों की अधिकता होती है, जो अधिक वैचित्रयाधायक, कल्पना सम्भरित तथा अनुरंजनक्षम है। यही मूकाभिनय शैली की विशेषता है। संचालन कर रहे संजीव पाण्डेय ने हमारी संस्कृति-हमारी पहचान विषय पर छात्रों के लिए एक कार्यशाला भी संचालित किया। इस अवसर पर प्रबंधक रमाकांत वर्मा, विद्यालय के प्रिंसिपल, शैक्षिक स्टाफ आदि उपस्थित रहे।

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