उत्तर भारत व दक्षिण भारत के मध्य एकता के सेतु समान थे सुब्रमण्यम भारती: असफर अली

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आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। एक भारत श्रेष्ठ भारत के तत्वाधान में शिब्ली नेशनल महाविद्यालय के मोकिमा वीवी हाल में रविवार को महकवि सुब्रमण्यम भारती के पावन जयंती पर भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर अफसर अली ने कहा कि सुब्रमण्यम भारती तमिल कवि थे। उनको महाकवि भारतियार के नाम से भी जाना जाता है। उनकी कविताओं में राष्ट्रभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है। वही अरबी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मोहिउददीन आजाद इस्लाही ने कहा कि वह कवि होने के साथ-साथ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल सेनानी, समाज सुधारक, पत्रकार तथा उत्तर भारत व दक्षिण भारत के मध्य एकता के सेतु समान थे। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अल्ताफ अहमद ने कहा कि उनका जन्म 11 दिसंबर 1882 को भारत के दक्षिणी प्रांत तमिलनाडु के एक गांव एट्टयपुरम में एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय में ही हुई। मेधावी छात्र होने के नाते वहा के राजा ने उन्हें भारती की उपाधि दी। अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मुनीर ने कहा कि सुब्रमण्यम भारती उच्च शिक्षा वाराणसी से हासिल किया। अगले 4 वर्ष उनके जीवन में खोज के वर्ष थे। कार्यक्रम का संचालन कर रहे उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ताहिर ने कहा कि वे इंडिया के नाम से अखबार निकाला करते थे। उन्होंने कहा था कि भूख से दुनिया में अगर किसी की मौत हुई तो इंकलाबी आंदोलन होगा। तलवार उठाने में जज्बा की जरूरत होती हैं। वह जज्बा लोगों में पैदा करना होगा। दर्शन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ बी के सिंह ने कहा कि बनारस प्रवास की अवधि में उनका हिंदू आध्यात्म व राष्ट्रप्रेम से साक्षात्कार हुआ। सन 1900 तक वे भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में पूरी तरह जुड़ चुके थे। हिंदी विभाग के शरद राय ने कहा कि भगिनी निवेदिता, अरविंद और वंदे मातरम के गीत ने भारती के भीतर आजादी की भावना को पल्लवित किया। कार्यक्रम में प्राचार्य प्रोफेसर अफसर अली, चीफ प्रॉक्टर डॉ एहतेशयामुल हक, प्रोफेसर सादीक, डॉ मुकर्रम अली, डा राफे, अरूण यादव, बदीउउजुमा, तथा महाविद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षणेतर कर्मचारी, हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, अरबी एवं फारसी के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
पटवध प्रतिनिधि के अनुसार राजकीय इंटर कॉलेज जोकहरा ़ में तमिल लेखक कवि समाज सुधारक पत्रकार और साथ ही साथ भारतीय स्वतंत्रता के कार्यकर्ता सुब्रमण्यम भारती के जन्मदिवस को भारतीय भाषा उत्सव के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के अध्यापक ज्ञान प्रकाश राय ने कहा कि श्री भारती तमिल कविता के अग्रदूत थे बहु भाषा विद भी थे, उनको महाकवि भारतीयार के नाम से भी जाना जाता है इनकी कविताओं में राष्ट्रभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है एक कवि होने के साथ-साथ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल सेनानी भी थे। सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण पर श्री भारती की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं महा कवि का जीवन विचार और लेखन हमारी आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। महान संस्कृतियों के बीच एकता और समानता का ही उत्सव है। इस अवसर पर श्री राय के अलावा विद्यालय के कर्मचारी पंचानंद राय, अजय कुमार सिंह, अरुण राय, केदार यादव, महातम यादव, विजय कुमार राय एवं सैकड़ों छात्र एवं छात्राएं विद्यालय प्रांगण में उपस्थित थे।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/बबलू राय

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