आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। आमतौर पर किसी भी पूजा में कलश की स्थापना होती है लेकिन नवरात्र में स्थापित कलश का विशेष महत्व है। इसमें स्थापित कलश और उसमें लगाया गया जौ भविष्य का संकेत देता है कि आगे का समय कैसा होगा। ब्राह्माणों के मुताबिक अगर नौ दिन में जौ अंकुरित होकर भूमि को स्पर्श कर ले या फिर कलश के नीचे की मिट्टी में लगा जौ अंकुरित होकर कलश को छू ले तो आने वाला समय उन्नति का संकेत देता है। बेहतर अंकुरण से संपन्नता में कमी नहीं आएगी। कलश में गोबर के गोंठ में लगाए जाने वाले जौ के रहस्य से हर कोई परिचित नहीं होता।
चक्रपानपुर क्षेत्र के प्रसिद्ध कर्मकांडी आचार्य रामबदन पांडेय कहते हैं कि दरअसल नौ दिन में यही जौ शुभ-अशुभ का संकेत देता है। इन नौ दिनों में अगर कलश में लगे जौ का अंकुरण ठीक से हो जाए तो भविष्य में संपन्नता और अगर अंकुरण अच्छा नहीं हुआ तो आने वाला भविष्य मध्यम तथा बिल्कुल अंकुरण न होने पर आर्थिक विपन्नता व अन्य कष्टों का संकेत देता है। नवरात्र में आदिशक्ति की आराधना होती है। आदिशक्ति में सारी दैवीय शक्तियां समाहित होती हैं। कलश को गाय के गोबर से गोंठने के बाद जौ लगाने के पीछे के कारणों से ज्यादातर लोग परिचित नहीं होते जबकि गाय के गोबर व उसमें जौ लगाने के पीछे एक बड़ा कारण होता है। गाय के गोबर को गौरी व गणेश का प्रतीक माना जाता है और इससे लक्ष्मी की प्रसन्नता का आभास होता है।
श्री पांडेय कहते हैं कि गौरी-गणेश का प्रतीक गाय का गोबर लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसमें लगाया गया जौ अगर अच्छी तरह से अंकुरित होता है तो यह इस बात का संकेत है कि आने वाला समय उत्तम होगा। अगर जौ अंकुरित नहीं हुआ तो वह इस बात का संकेत है कि लक्ष्मी प्रसन्न नहीं हैं और आने वाला समय खराब बीतेगा। साथ ही जिस मन्नत को लेकर कलश की स्थापना की गई उसके पूरा होने में संदेह होगा। कुछ लोग कलश के नीचे मिट्टी रखकर उसमें भी जौ लगाते हैं। इसमें भी दो बाते हैं। अगर कलश के नीचे का जौ बढक़र कलश के ऊपर तक पहुंच जाए या फिर कलश में लगा जौ बढक़र नीचे की तरफ लटक जाए तो माना जाता है कि आने वाला समय सर्वाेत्तम होगा। ऐसे अंकुरण को विजयदशमी के दिन हर किसी को ब्राह्मण द्वारा प्रदान किया जाता है और मान्यता यह है कि उससे उन लोगों का भी शुभ होता है जिनके घर कलश की स्थापना नहीं होती। कुल मिलाकर कलश का जौ अच्छे और बुरे भविष्य का संकेत देता है। ऐसे में प्रयास यह होना चाहिए कि नवरात्र में लोग अपने घरों में कलश की स्थापना जरूर करें और अगर घर में यह काम संभव न हो तो किसी भी देवी मंदिर में इसकी स्थापना की जानी चाहिए।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव