मानवता की मिसाल: असहाय वृद्धा को मिली सुरक्षित छत

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लालगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। मोहम्मदपुर विकासखंड के रानीपुर रजमो गांव में कड़कड़ाती धूप और मूसलाधार बारिश के बीच वर्षों से एक असहाय वृद्धा महज एक बांस और फटे प्लास्टिक के सहारे जिंदगी गुजारने को मजबूर थी। गरीबी और बेबसी के बीच उसका जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा था। ऐसे समय में अंबिका सेवा संस्थान के युवाओं ने आगे बढ़कर मानवता की मिसाल पेश की और वृद्धा को सुरक्षित छत उपलब्ध कराई।
घटना तीन दिन पहले की है। अंबिका सेवा संस्थान की टीम रानीपुर रजमो के ग्रामीण इलाके से गुजर रही थी। इसी दौरान मूसलाधार बारिश के बीच एक बांस के सहारे लगाए गए प्लास्टिक के नीचे भीगती वृद्धा पर सामाजिक कार्यकर्ताओं की नजर पड़ी। वृद्धा की स्थिति देखकर टीम ने तत्काल उसकी मदद करने का निर्णय लिया। इसके दो दिन बाद अंबिका सेवा संस्थान के बैनर तले विशेष मदद अभियान चलाया गया। संस्थान के कार्यकर्ता गांव पहुंचे और महज चार घंटे की मेहनत में बल्लियों के सहारे करकट (टिनशेड) की मजबूत छत तैयार कर दी। वर्षों बाद वृद्धा को प्लास्टिक की जगह अपने सिर के ऊपर एक सुरक्षित छत मिली। सिर्फ छत ही नहीं, बल्कि संस्थान की टीम ने वृद्धा को जीवन-यापन के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई। इसमें ओढ़ने के लिए कंबल, नई साड़ी व कपड़े तथा खाने-पीने की आवश्यक सामग्री शामिल रही।
राहत अभियान के दौरान संस्थान के प्रभारी अभिषेक उपाध्याय, प्रमोद सोनी, पवन अस्थाना, लकी श्रीवास्तव, रिंकू विश्वकर्मा एवं शैलेश प्रजापति का योगदान उल्लेखनीय रहा। कार्यकर्ताओं ने अपनी मेहनत और समर्पण से यह संदेश दिया कि समाजसेवा केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंदों तक पहुंचकर किए गए कार्यों से सार्थक होती है। अंबिका सेवा संस्थान की इस पहल की स्थानीय ग्रामीणों ने भी सराहना की। वर्षों से अभाव में जीवन गुजार रही वृद्धा को महज कुछ घंटों में सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराकर संस्थान ने मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।
रिपोर्ट-मकसूद अहमद

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