आज़मगढ़ (सृष्टिमीडिया)। गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेश की ओर से दलालघाट मस्जिद अबू बक्र सिद्दीक़ में ख्वातीन का किरदार सीरत-ए-रसूल की रोशनी में विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें लगभग 700 से अधिक छात्राओं व महिलाओं ने भाग लिया।
मुख्य वक्ता मौलाना ताहिर मदनी ने असर-ए-हाज़िर की औरत विषय पर अपने विचार रखते हुए छात्राओं का आह्वान किया कि वे शिक्षा को अहंकार के बजाय समाज सेवा का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम छात्रा की असली सफलता केवल शैक्षणिक योग्यता में नहीं, बल्कि इल्म के साथ हया, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारियों के निर्वहन में है। उन्होंने सोशल मीडिया का सही और सकारात्मक इस्तेमाल करने तथा अच्छी संगति चुनने पर विशेष जोर दिया।
मौलाना ज़कीउर्रहमान ग़ाज़ी फ़लाही ने समाज सुधार में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके अलावा, सहाबियात की कुर्बानियां विषय पर परिचर्चा और गिरते कदम, बदलती दुनिया और नबवी हौसला विषय पर पैनल डिस्कशन का आयोजन भी हुआ।
शुरुआती सत्र को नसीमा इब्राहीम फ़लाही और सलमा सलामतुल्लाह फ़लाही ने संबोधित किया। संचालन अज़ीज़ा उकसा फ़ैज़ान फ़लाही तथा समापन फ़ारहा साक़िब फ़लाही के धन्यवाद और क़मर जहां की दुआ के साथ हुआ।
रिपोर्ट-सुबास लाल/ज्ञानेन्द्र कुमार