मार्टिनगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थानीय तहसील क्षेत्र के बरदह पशु चिकित्सालय परिसर और उसके आस-पास की सरकारी जमीन पर गांव के कुछ दबंगों द्वारा लगातार अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि बेशकीमती सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की कोशिशें जोरों पर हैं, लेकिन जिम्मेदार अस्पताल प्रशासन और स्थानीय राजस्व विभाग पूरी तरह से मौन साधे बैठा है।
सूत्रों के अनुसार, बरदह पशु चिकित्सालय के पास की खाली पड़ी जमीन और बाउंड्री से सटी जमीनों पर स्थानीय दबंगों की लंबे समय से बुरी नजर है। पिछले कुछ दिनों से यहां धड़ल्ले से कब्जा जमाने का प्रयास किया जा रहा है। विरोध करने वाले स्थानीय लोगों का आरोप है कि दबंग सत्ता और रसूख के बल पर सरकारी संपत्ति को निजी संपत्ति में तब्दील करने पर आमादा हैं।
सार्वजनिक संपत्ति पर हो रहे इस अवैध कब्जे को लेकर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब इस बाबत चिकित्सालय के जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की जाती है, तो वे या तो मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं या फिर चुप्पी साध लेते हैं। लोगों में इस बात की चर्चा आम है कि बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के इतनी आसानी से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण संभव नहीं है।
बरदह पशु चिकित्सालय क्षेत्र के पशुपालकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य केंद्र है। ऐसे में यदि चिकित्सालय के आसपास ही अवैध कब्जा स्थायी हो गया, तो भविष्य में न केवल अस्पताल आने वाले लोगों के लिए रास्ता बाधित होगा, बल्कि सरकारी और प्रशासनिक भवन के अस्तित्व पर भी संकट गहरा सकता है।
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और पशुपालकों ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर मामले की ओर आकर्षित किया है। लोगों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इस अवैध अतिक्रमण के प्रयास को रुकवाया जाए और मूकदर्शक बने रहने वाले या मिलीभगत में संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की जांच कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है।
रिपोर्ट-अद्याप्रसाद तिवारी