लालगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। सावन मास के दूसरे सोमवार को घंटे, घड़ियाल तथा हर हर महादेव के जयकारे से शिवालय गूंज उठे। सावन महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। दूसरे सोमवार को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी का भी योग है। इस नाते आज के दिन की गई व्रत, उपासना का विशेष महत्व है।
सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म करने के बाद अगले जन्म में वह हिमालय तथा मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लीं। इस जन्म में उन्होंने सावन महीने में भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। सावन महीना भगवान शिव के साथ-साथ मां पार्वती को भी बहुत प्रिय है। क्योंकि इसी महीने की उनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। अतः सावन महीने में हमें शिव के साथ-साथ मां पार्वती की भी आराधना करनी चाहिए। शक्ति के बिना शिव शव रुप में हैं। प्राण शक्ति के अभाव में यह शरीर निर्जीव है। शिव का शिवत्व मां पार्वती के कारण ही है। माता पार्वती जगत जननी हैं। वह सृष्टि की आदिशक्ति हैं।
इस अवसर पर राम जानकी मंदिर मसीरपुर के पुजारी राधेश्याम जी महाराज, ओम प्रकाश सिंह तिलखरा, ज्ञानमती सिंह, अमित सिंह आदि ने अभीष्ट फल प्राप्ति हेतु भोलेनाथ से प्रार्थना की।
रिपोर्ट-मकसूद अहमद