आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा अनुभाग से मंगलवार को राजकीय महाविद्यालयों के संविदा से विनियमित शिक्षकों के हक में जारी शासनादेश के तहत उनकी संविदा काल की सेवाओं को उनके प्रोन्नति में जोड़ने का आदेश निर्गत होते ही विनियमित राजकीय डिग्री शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष डॉ दीनानाथ सिंह एवं पूर्व संयुक्त महामंत्री डॉ जगदीश सिंह दीक्षित ने वर्षों से लगातार मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री से यही मांग करता रहा है, और कई बार शासन के प्रतिनिधियों से भी चर्चा हुई कि जो भी राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों के मानदेय शिक्षक विनियमित हुए हैं उनकी पूर्व की सेवाओं को जोड़कर कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोन्नति में लाभ दिया जाय. सरकार ने अभी केवल राजकीय महाविद्यालयों के संविदा शिक्षकों को य़ह लाभ दिया है. डॉ0 जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि सरकार से राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ यह मांग करता है कि दोनों ही तरह के शिक्षकों की सेवायें एक तरह की हैं इसलिए अनुदानित महाविद्यालयों के जो भी मानदेय शिक्षक हैं उनके लिए भी शीघ्र शासनादेश किया जाए।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की महाराजा सुहेलदेव विश्विद्यालय आज़मगढ़ इकाई के अध्यक्ष डॉ0 पंकज सिंह महामंत्री डॉ0 प्रदीप कुमार राय, उपाध्यक्ष प्रो0 वन्दना सिंह, प्रो0 अजीत प्रसाद राय एवं डॉ0 सुधीर कुमार सिंह ने संगठन की ऑनलाइन बैठक कर शासन के इस निर्णय पर साधुवाद देते हुए कहा कि शासन को पुनः पत्र व अन्य माध्यमों से अनुदानित महाविद्यालयों के मानदेय से विनियमित शिक्षकों के लिए भी शीघ्र शासनादेश निर्गमन की मांग रखी जायेगी। डॉ. दीनानाथ सिंह एवं डॉ0 जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि ऐसा करना ही प्राकृतिक न्याय और समानता के संवैधानिक अधिकारों के अनुकूल होगा।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/ज्ञानेन्द्र कुमार